script Health update: थैलेसीमिया के इलाज के लिए आ गई दुनिया की पहली जीन थेरेपी | worlds 1st gene therapy to treat sickle-cell and thalassemia | Patrika News

Health update: थैलेसीमिया के इलाज के लिए आ गई दुनिया की पहली जीन थेरेपी

locationजयपुरPublished: Nov 18, 2023 01:33:41 pm

Submitted by:

Jaya Sharma

ब्रिटेन ने जीन-एडिटिंग टूल सीआरआईएसपीआर का उपयोग करके रक्त विकारों जैसे सिकल-सेल और थैलेसीमिया के इलाज के लिए दुनिया की पहली जीन थेरेपी को मंजूरी दे दी है, जिसने इसके आविष्कारकों को 2020 में नोबेल पुरस्कार दिलाया था।

सिकल सेल रोग और बीटा-थैलेसीमिया दोनों आनुवंशिक स्थितियां हैं जो हीमोग्लोबिन के जीन में त्रुटियों के कारण होती हैं
Health update: थैलेसीमिया के इलाज के लिए आ गई दुनिया की पहली जीन थेरेपी
अभी तक थैलेसीमिया का एक मात्र स्थाई इलाज बोनमेरो ट्रांसप्लांट था। जो किसी करीबी से ही संभव था। लेकिन अब यूके की मेडिसिन्स एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी ने 12 वर्ष और उससे अधिक उम्र के सिकल सेल रोग और ट्रांसफ्यूजन-निर्भर बीटा-थैलेसीमिया वाले रोगियों के लिए कैसगेवी नामक नए उपचार को अधिकृत किया है।सिकल सेल रोग और बीटा-थैलेसीमिया दोनों आनुवंशिक स्थितियां हैं जो हीमोग्लोबिन के जीन में त्रुटियों के कारण होती हैं।
ऐसे किया है तैयार
कैसगेवी को मरीज की बोनमेरो स्टेम कोशिकाओं में दोषपूर्ण जीन को हटाने के काम के लिए डिज़ाइन किया गया है ताकि शरीर कार्यशील हीमोग्लोबिन का उत्पादन कर सके। ऐसा करने के लिए, स्टेम कोशिकाओं को बोनमेरो से बाहर निकाला जाता है, एक प्रयोगशाला में संपादित किया जाता है और फिर रोगी में वापस डाला जाता है जिसके बाद परिणाम जीवन भर रहने की संभावना होती है।
घातक हैं दोनों बीमारियां
सिकल सेल रोग वाले लोगों में आनुवंशिक त्रुटि के कारण बहुत गंभीर दर्द, गंभीर और जीवन-घातक संक्रमण और एनीमिया हो सकता है। वहीं बीटा-थैलेसीमिया रोगियों में यह गंभीर एनीमिया का कारण बन सकता है। कैसगेवी दोनों ही रोगों में हीमोग्लोबिन उत्पादन को बहाल करने के लिए पाया गया है। इसके अध्ययन में काफी हद पॉजिटिव रिजल्ट नजर आए है और इन रोगियों को जीवन जीने की राह मिली है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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