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ग्रह और राशियों से भी पता चलता है व्यक्ति के स्वभाव का

मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ राशियों को पुरुष राशियां बताया गया है वहीं वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर तथा मीन स्त्री राशियां हैं

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Sunil Sharma

Dec 20, 2015

Chanakya niti happy life father

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राशियों का वर्गीकरण कई आधारों पर किया गया है। मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशियों को पुरुष राशियां बताया गया है वहीं वृष, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन स्त्री राशियां हैं। सूर्य और मंगल जैसे पुरुष ग्रह पुरुष राशियों में बेहतर परिणाम देते हैं और चंद्रमा और शुक्र जैसे स्त्री ग्रह स्त्री राशियों में।

गति के हिसाब से होती है तीन प्रकार की राशियां

गति के हिसाब से राशियां तीन प्रकार की हैं। मेष, कर्क, तुला और मकर राशियां चर राशियां हैं। वृष, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर हैं और मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशियां द्विस्वभाव राशियां हैं। चर राशियों वाले जातक तीव्र गति वाले, स्थिर राशि वाले जातक अपेक्षाकृत स्थिर रहकर काम करने वाले होते हैं। द्विस्वभाव राशि वाले जातक समय के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं, परिवर्तनशील होते हैं।

तत्व के अनुसार चार प्रकार की होती हैं राशियां

तत्व के अनुसार राशियों को चार प्रकार में बांटा गया है। अग्नि, पृथ्वी, वायु और जल तत्व। मेष, सिंह और धनु राशियां अग्नितत्वीय है, वृष, कन्या और मकर राशियां पृथ्वीतत्वीय हैं। मिथुन, तुला और कुंभ राशियां वायु तत्वीय हैं और कर्क, वृश्चिक और मीन जलतत्वीय हैं।

चंद्रमा और मंगल का होता है ऐसा असर

चंद्रमा का प्रभाव खराब होने पर जातक स्वार्थी और दूसरों के सुखदुख से विरक्त रहने वाला होता है। मंगल को जाति से क्षत्रिय माना गया है। यह तेज, उग्र, बलशाली, मेहनती और साहस से भरा होता है। मंगल प्रभावित जातक बहुत अधिक लॉजिकल और अनुशासनप्रिय होते हैं। सेना-पुलिस के उच्च अधिकारियों और प्रबंधन के शीर्ष स्थानों पर बैठे जातकों में मंगल का शुभ प्रभाव देखा जा सकता है।

राहू-केतु का स्वभाव

राहू दैत्य के केवल सिर वाला भाग है। ऐसे में राहू के प्रभाव में जातक केवल चिंतन करता है। उस दौरान वह कोई परिणामजनक कार्य नहीं कर पाता है। केतू को मंगल का प्रतिनिधि माना गया है। इससे प्रभावित जातक आमतौर पर पतले ही होते हैं। ये लोग ऊर्जावान होते हैं, लेकिन विचारवान नहीं। अपने काम में लगातार लगे रहते हैं, बिना परिणाम के बारे में सोचे।