लाॅकडाउन में अगर आपके बच्चे में दिख रहा यह बदलाव तो हो जाएं सचेत, अपनाइए यह तरीका

Prepare for lockdown effect

  • लाॅकडाउन में बड़े-बुजुर्गां पर ही नहीं बच्चों पर भी मानसिक तनाव का असर
  • कहीं आपके चिंता व तनाव का असर बच्चों पर तो नहीं पड़ रहा

कोरोना वायरस (Corona) से बचाव के लिए लागू लाॅकडाउन (Lockdown) से सबसे अधिक परेशान बच्चे हैं। लाॅकडाउन में हर घर में बड़े-बुजुर्ग तनाव व डर में जी रहे, ऐसे में बच्चों पर भी उसका असर पड़े इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। बच्चों को इस दौरान मानसिक रूप से तैयार किया जाना बेहद आवश्यक है।

Read this also: लाॅकडाउन के बीच दो अधिकारियों के बीच मतभेद खुलकर आया सामने, विधायक ने किया हस्तक्षेप तो...

यूनिसेफ के एक अध्ययन के मुताबिक इस वक्त कोरोना महामारी की वजह से बच्चों में भी चिंता, तनाव और अनिश्चितता के भाव हैं।(Mental stress due to lockdown) चूंकि, स्कूल बंद हैं, इनकी गतिविधियां बेहद सीमित हैं तो यह उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा रहे हैं। जानकार मानते हैं कि बच्चे घर से बाहर नहीं निकल रहे, दोस्तों से नहीं मिल रहे हैं तो उनपर मानसिक दबाव भी पड़ रहा है।

Read this also: Lockdown effect in Pachmadhi लाॅकडाउन से परेशान दैनिक कामगारों की मदद के लिए मंथन

बालमन को समझने वाले विशेषज्ञों की मानें तो घर के अंदर बच्चों को व्यस्त रखकर उनका मन किसी दूसरी दिशा में डायवर्ट किया जा सकता है। बच्चों से ऐसी गतिविधियां करवाएं, जिसमें उनकी रुचि हो, वे उसमें मन लगा सकें और इस महामारी के कारण हो रहे तनाव से दूर रह सकें। माता-पिता के लिए भी बच्चों की इन गतिविधियों में शामिल होना काम का हो सकता है।

Read this also: अगर कर रहे मास्क, गमछा या रुमाल का इस्तेमाल तो यह खबर आपके लिए है

बच्चों के लिए यह काम जरूर करें

विशेषज्ञ बताते हैं कि सबसे पहली और जरूरी बात है कि लाॅकडाउन के दौरान डेली रूटीन सही रखें। बच्चों के सोने, खाने, एक्सरसाइज, पढ़ाई और खेल के समय को सही तरीके से शेड्यूल करें। रूटीन का बच्चों के ऊपर सही असर पड़ता है। रोजाना दिन में कम से कम एक घंटा बच्चों के साथ बातचीत करें, उनकी मन की सुने। बच्चों के साथ हमेशा सकारात्मक व्यवहार करें। खुद के गुस्से, अवसाद, चिंता आदि नकारात्मक भावनाओं पर नियंत्रण रखें। बच्चों से उनकी मन की बात सुने, पूछे कि वह क्या क्या करना चाहते हैं। उनको सोशल डिसटेंसिंग के बारे में समझाएं।

Read this also: लाॅकडाउन में परेशान किसानः गांव में क्रय केंद्र लेकिन बेचने जाना होगा बीस किलोमीटर दूर

बच्चा अगर चिड़चिड़ा हो रहा है तो उसे सकारात्मक ढंग से समझाएं, उसके इस बदल व्यवहार की वजह तलाशने की कोशिश करें। बच्चों को अपने दोस्तों से बातचीत करने के लिए मोबाइल, इंटरनेट आदि के प्रयोग पर रोक न लगाएं बल्कि इसके लिए प्रोत्साहित करें।

Read this also: फसल अवशेष जलाकर खेतों व पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के लिए नजीर हैं मानसिंह गुर्जर

धीरेन्द्र विक्रमादित्य
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned