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नई दिल्ली। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कबूतरों को कैसे खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए खास ट्रेनिंग दी जाती थी। अमरीका की सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी की कुछ खुफिया रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा हुआ है। 1960 और 1970 के दशक के कुछ दस्तावेजों में इस बात का ज़िक्र किया गया है। एक अंग्रेज़ी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस बात का खुलासा हुआ है कि इन कबूतरों को खास ट्रेनिंग दी जाती थी। बता दें कि खुफिया एजेंसियां कई बार कबूतरों से तस्वीरें खिंचवाने का काम करती थीं। इतना ही नहीं वे कौवे और डॉल्फिन को भी दुश्मन की जासूसी करने के लिए ट्रेन करते थे। कौवों का काम होता था किसी जासूसी डिवाइस को किसी खास जगह पर गिराएं।
डॉल्फिनों की बात करें तो सिटेशियन प्रजाति जासूसी में माहिर होती हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा हुआ है कि उन्हें कई देश नौसेना के लिए जासूसी करने की ट्रेनिंग देते थे। वे पानी के अंदर सोनार तरंगों को भांपने में माहिर होती हैं। उन्हें इस बात के लिए तैयार किया जाता था कि वे पानी के अंदर बारूदी सुरंगों का पता लगा सकें। इस काम को एकोलोकेशन का नाम दिया गया है। रूस और अमरीका के बीच चल रहे तनाव के चरम पर पहुंचने के दौरान सीआईए मानती थी कि ये जीव टारगेट तक पहुंचने में सेना की मदद करते थे। दस्तावेजों के मुताबिक कबूतर के गले में एक कैमरा लगाया जाता था जो ऑटोमेटिक फोटो खींचने का काम करता था।
Published on:
18 Sept 2019 01:27 pm
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