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छह साल की बच्ची को पेट में हो रहा था दर्द, अल्ट्रासाउंड करते ही डॉक्टर के उड़े होश

पंजाब के लुधियाना में छह साल की बच्ची को उसके मां-बाप पेट में दर्द की शिकायत पर डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने जब बच्ची के पेट का अल्ट्रासाउंड किया तो हैरान रह गए।
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Vinay Saxena

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Updated: 17 Sep 2018, 12:15 PM IST

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छह साल की बच्ची को पेट में हो रहा था दर्द, अल्ट्रासाउंड करते ही डॉक्टर के उड़े होश

नई दिल्ली: पंजाब के लुधियाना में छह साल की बच्ची को उसके मां-बाप पेट में दर्द की शिकायत पर डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर ने जब बच्ची के पेट का अल्ट्रासाउंड किया तो हैरान रह गए। पता चला कि पेट में गोले के आकार का कुछ है। लेकिन, ये साफ नहीं हो पा रहा था कि असल में वह चीज क्या है। इसके बाद बच्ची की इंडोस्कॉपी की गई, जिसमें पता चला कि छोटी आंत में जिगर के पास बालों का एक गुच्छा बना हुआ है।

छह महीने से अपने ही बाल खा रही थी बच्ची


मामला लुधियाना के दाद गांव का है। जानकारी के मुताबिक, यहां रहने वाली छह साल की बच्ची गुरजोत कौर पिछले छह महीने से अपने ही बाल खा रही थी। जब पेट में दर्द हुए तो परिजन उसे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने देखा तो वह भी हैरान रह गए। उसके पेट में एक मीटर लंबी बालों की चोटी बन गई थी। भूख नहीं लगने पर उसका वजन भी केवल 14 किलो रह गया था।

इंडोस्काॅपी में दिखा बालों का गुच्छा


डॉक्टर ने पहले अल्टा्रसाउंड किया तो पेट में गोले के आकार का कुछ दिखा, लेकिन ये साफ नहीं हो पाया कि असल में वह चीज क्या है। इसके बाद बच्ची की इंडोस्कॉपी कराई गई, जिसमें पता चला कि पेट की छोटी आंत में जिगर के पास बालों का गुच्छा है। इसके बाद डॉक्टरों ने आॅपरेशन कर बच्ची के के पेट की छोटी आंत में फंसी करीब करीब एक मीटर बालों की चोटी बाहर निकाली। चोटी सांप की तरह बनी हुई थी। फिलहाल, ऑपरेशन के बाद बच्ची नॉर्मल है और उसे अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है।

पेट में नहीं पचते हैं बाल

बाल खाने की आदत को रेपुंजल सिंड्रोम कहते है। डॉक्टर्स के मुताबिक, बाल खाने की आदत को रेपुंजल सिंड्रोम कहा जाता है। ऐसा बच्चे तब करते हैं, जब उन्हें इग्नोर किया जाता है या वो खुद को बहुत अकेला महसूस करते हैं। बाल हमारे पेट में पचते नहीं हैं। थोड़े बहुत छोटे बाल हमारे मल के साथ बाहर भी निकल सकते हैं, लेकिन बड़े बाल बाहर नहीं आते। जैसे-जैसे बालों के इस गोले का साइज बढ़ता है, पेट दर्द और बदहजमी जैसी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं।