संविधान में नहीं है बजट शब्द का जिक्र फिर भी कहा जाता है आम बजट, जानें क्यों है ऐसा

संविधान में नहीं है बजट शब्द का जिक्र फिर भी कहा जाता है आम बजट, जानें क्यों है ऐसा

Prakash Chand Joshi | Updated: 05 Jul 2019, 07:00:00 AM (IST) हॉट ऑन वेब

  • Union Budget 2019: आज पेश होगा बजट
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में पेश करेंगी बजट
  • देश को इस आम बजट से हैं काफी उम्मीदें

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Nirmala Sitharaman ) वित्तवर्ष 2019-20 के लिए संसद में आज यानि 5 जुलाई को आम बजट पेश करेंगी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार का दूसरा कार्यकाल शुरू होने के बाद ये पहला वार्षिक बजट होगा। इसी साल फरवरी में तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ( Piyush Goyal ) ने अंतरिम बजट पेश किया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिसको हम आम बजट करके बोलते हैं, हमारे संविधान में 'बजट' जैसा कोई शब्द ही नहीं है।

 

union budget

क्या कहता है संविधान

दरअसल, भारतीय संविधान ( Constitution of India ) में 'बजट' शब्द का जिक्र नहीं है। लेकिन फिर भी हम आम बोलचाल में आम बजट का प्रयोग करते हैं। ऐसे में सवाल बड़ा ही सिंपल सा है कि फिर संविधान में इसे क्या कहते हैं? तो आपको बता दें कि संविधान के आर्टिकल 112 में इसे एनुअल फाइनेंशियल स्टेटमेंट कहा गया है। फाइनेंशियल स्टेटमेंट अनुमानित प्राप्तियों और खर्चों का उस साल के लिए सरकार का विस्तृत ब्योरा होता है। इस आम बजट ( union budget ) में सरकार की आर्थिक नीति की दिशा दिखाई देती है। जिसमें मंत्रालयों को उनके खर्चों के लिए पैसे का आवंटन होता है।

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इन चीजों से मिलकर बनता है बजट

वहीं लोगों के मन में एक सवाल ये भी रहता है कि आखिर ये बजट किन दसतावेजों से मिलकर बनता है? तो आपको बता दें कि बजट डॉकेट में लगभग 16 दस्तावेज होते हैं, जिसमें बजट भाषण, सभी मंत्रालयों के खर्च के प्रस्ताव का विस्तृत ब्योरा, ये रकम कहां से आएगी, फाइनेंस बिल और एप्रोप्रिएशन बिल भी इस डॉकेट में शामिल होते हैं। जहां फाइनेंस बिल में अलग-अलग टैक्सेशन कानूनों में प्रस्तावित संशोधन होते हैं, तो वहीं एप्रोप्रिएशन बिल में सभी मंत्रालयों को होने वाले आवंटनों का लेखा-जोखा होता है। साथ ही वित्त मंत्री का जो भाषण होता है, उसके भी दो हिस्से होते हैं। पार्ट ए में हर सेक्टर के लिए आवंटन का मोटे तौर पर जिक्र होता है। वहीं पार्ट बी में सरकार के खर्च के लिए पैसा जुटाने के लिए टैक्सेशन के प्रस्ताव होते हैं।

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