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तुलसी खाने से होते हैं ये नुकसान, जानिए कैसे करें इसका प्रयोग

तुलसी का सेवन कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। तुलसी के पत्ते को सबसे बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-बायोटिक माना जाता है।

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Sunil Sharma

Dec 23, 2020

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लोग घरों के आंगन में तुलसी लगाकर रोज उसकी पूजा करते और जल चढ़ाते हैं, लेकिन तुलसी केवल धार्मिक महत्व का पौधा नहीं है बल्कि इसके कई चिकित्सीय गुण भी हैं। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बूटी कहा जाता है। इसमें अनेको औषधीय गुण पाये जाते हैं। तुलसी का सेवन कफ द्वारा पैदा होने वाले रोगों से बचाता और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। तुलसी के पत्ते को सबसे बेहतरीन प्राकृतिक एंटी-बायोटिक माना जाता है।

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गर्म तासीर वाली तुलसी प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन और विटामिन ए, सी, ई, के, बी 6 से युक्त होती है प्रतिदिन 1 से 3 तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं बच्चे को तुलसी का एक पत्ता देना चाहिए। पित्त प्रकृति वाले गिलोय, आंवला और एलोवेरा के साथ तुलसी लें।

फायदा
यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के अलावा यह बुखार नियंत्रित करता है और त्वचा व दांत संबंधी, अस्थमा, फेफड़ों, हृदय संबंधी, और तनाव ग्रस्त रोगियों के लिए लाभकारी है।

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तुलसी के सेवन में रखें सावधानी
दरअसल तुलसी के पत्ते में भारी मात्रा में आयरन और मर्करी (पारा) पाया जाता है। तुलसी के पत्ते को चबाने पर ये तत्व हमारे मुंह में घुल जाते हैं। ये दोनों ही तत्व हमारे दांतों की सेहत और उनकी सुंदरता के लिए नुकसानदेह हैं। तुलसी थोड़ी अमलीय यानी कि एसिडिक नेचर की होती है, इसलिए रोजाना इसका सेवन दांतों की तकलीफों को बढ़ा सकता है। हालांकि तुलसी का ताजा रस मुंह के अल्सर के लिए काफी फायदेमंद होता है लेकिन फिर भी तुलसी के पत्ते को चबाने से मना किया जाता है। तुलसी की तासीर गरम होती है और गरम प्रवृति के लोगों को इसका उपयोग डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए।

कैसे करें सेवन
चाय के साथ तुलसी का सेवन करना बेहतर तरीका है। तुलसी के पत्ते का उपयोग कर बनाई गई चाय इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है और मुंह के जर्म्स से सुरक्षा दिलाने में सहयोग करती है। इसके अलावा यह चेहरे के मुहांसो से भी छुटकारा दिलाती है। ब्लड शुगर के नियंत्रण में भी तुलसी के पत्ते की चाय अहम भूमिका निभाता है। तुलसी के पत्तों को बिना चबाए सीधे निगला भी जा सकता है। इसे पानी के साथ निगलकर या फिर इसका काढ़ा बनाकर (तुलसी को दूध या पानी में उबालना नहीं चाहिए, तुलसी को उबले पानी में ढककर इस्तेमाल में लेना चाहिए।) सेवन किया जा सकता है। अगर तुलसी के पत्ते चबाकर खाने कि आवश्यकता हो तो, तुलसी खाने के पश्चयात तुरंत कुल्ला कर लें। क्योकि इसका अम्ल दांतों के एनेमल को खराब कर देता हैं।

ध्यान रखें
तुलसी के अधिक सेवन से दांत और गुर्दे संबंधी, खांसी के दौरान खून, तेजी से श्वास, मुँह में अल्सर, गैस्ट्रिक संबंधी और मूत्र में खून आने जैसी समस्याएं हो सकती है। तुलसी खून को पतला करता है, इसलिए इसे किसी दवा के साथ लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

बचाव
दांतों संबंधी समस्या में मंजीठ और मुलेठी के काढेसे कुल्ला करें। किडनी संबंधी बीमारी में पुनर्नवा और गोकरु के काढे से कुल्ला करें।