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अब कलयुग में भी हो सकेंगे जटायु के दर्शन, आंखों के सामने घूमने लगेगा रामायण का ये दृश्य

केरल पर्यटन 4 जुलाई को जटायु अर्थ सेंटर का उद्घाटन करेगा, विश्व की इस सबसे बड़ी पक्षी प्रतिमा बनाने पर 100 करोड़ रुपए की लागत आई है।

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Priya Singh

Jun 04, 2018

worlds largest bird sculpture in kerala

अब कलयुग में भी हो सकेंगे जटायु के दर्शन, आंखों के सामने धूमने लगेगा रामायण का ये दृश्य

नई दिल्ली। विज्ञापनों में केरल को 'ईश्वर का अपना घर' (God's Own Country) कहा जाता है, यह कोई अतिशयोक्ति नहीं है। जिन कारणों से केरल विश्व भर में पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना है, समशीतोष्ण मौसम, समृद्ध वर्षा, सुंदर प्रकृति, जल की प्रचुरता, सघन वन, लम्बे समुद्र तट और चालीस से अधिक नदियां हैं। बता दें कि केरल पर्यटन 4 जुलाई को जटायु अर्थ सेंटर का उद्घाटन करेगा। विश्व की इस सबसे बड़ी पक्षी प्रतिमा बनाने पर 100 करोड़ रुपए की लागत आई है। यह प्रतिमा तिरुवनंतपुरम में 65 एकड़ में फैली है। इस काम का जिम्मा जटायु अर्थ सेंटर ने लिया है।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रामायण में जिस जगह पर लंकापति रावण ने सीता-हरण के समय पक्षीराज जटायु के पंख काटने पर यहीं जटायु का पंख गिरा था, बस तभी से इस जगह का नाम 'जटायुपारा' रख दिया गया। इसी स्थान पर राजीव अंचल ने जटायु अर्थ सेंटर बनाने का निर्णय लिया। मीडिया के साथ बातचीत में अंचल ने कहा, 'जटायु अर्थ सेंटर में एक संग्रहालय और 3डी थियेटर भी है, जिसकी शुरुआत नवंबर से हो गई है। इस सेंटर में जटायु की कहानी पर आधारित 10 मिनट की फिल्म भी दर्शकों को दिखाई जाएगी।' जटायु अर्थ सेंटर में एक संग्रहालय और 3डी थिएटर भी है, जिसकी शुरुआत नवंबर तक हो जाएगी। इस सेंटर में जटायु की कहानी पर आधारित 10 मिनट की फिल्म भी दर्शकों को दिखाई जाएगी। बता दें कि, विश्व की सबसे बड़ी पक्षी प्रतिमा बनाने पर 100 करोड़ रुपए की लागत आई है।

200 फीट लंबी और 65 फीट ऊंची होगी प्रतिमा

अपने शांत समुद्री तटों के लिए प्रसिद्ध केरल पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहता है अब विश्व की सबसे बड़ी पक्षी प्रतिमा के बाद यहां पर्यटकों की संख्या और होने की संभावना है। भारतीय पौराणिक शास्त्रों में प्रसिद्ध रामायण के चर्चित जटायु पक्षी की अवधारणा पर इस सेंटर का निर्माण किया गया है। पक्षी जटायु की प्रतिकृति 200 फीट लंबी, 150 फीट चौड़ी, 65 फीट ऊंची है और यह चट्टान के ऊपर दाहिने तरफ स्थित है। यह समुद्र तल से 1000 फीट ऊपर है। यह प्रतिमा तिरुवनंतपुरम में 65 एकड़ में फैली है।