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उपेक्षा के कारण खंडहर बना अगस्त्य तीर्थ मंदिर

ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध पुलिगेरे यानी वर्तमान लक्ष्मेश्वर शहर में पांच पवित्र तीर्थ हैं, जिनमें से अगस्त्यतीर्थ सबसे प्रसिद्ध स्थान है। इसका नाम अगस्त्यतीर्थ इसलिए पड़ा क्योंकि अगस्त्य मुनि ने यहां तपस्या की थी।

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उपेक्षा के कारण खंडहर बना अगस्त्य तीर्थ मंदिर

उपेक्षा के कारण खंडहर बना अगस्त्य तीर्थ मंदिर

तपस्या के दौरान अगस्त्य मुनि ने स्थापित किया था शिवलिंग
लक्ष्मेश्वर के तीर्थ के विकास के लिए बने योजना
गदग. ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध पुलिगेरे यानी वर्तमान लक्ष्मेश्वर शहर में पांच पवित्र तीर्थ हैं, जिनमें से अगस्त्यतीर्थ सबसे प्रसिद्ध स्थान है। इसका नाम अगस्त्यतीर्थ इसलिए पड़ा क्योंकि अगस्त्य मुनि ने यहां तपस्या की थी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मुक्तिनगर के सामने स्थित तीर्थ में भगवान ईश्वर का एक छोटा सा प्राचीन पत्थर का मंदिर है, हाल के दिनों में मंदिर का और भी विस्तार किया गया है।

इसके चलते इस मंदिर के गर्भ गृह में अगस्त्य मुनि की ओर से स्थापित एक शिवलिंग और बसवन्ना की मूर्ति के साथ नए से प्रतिष्ठापित एक और विशाल शिवलिंग है। पुराना शिवलिंग गर्भ गृह के अंदर है तो नव स्थापित शिवलिंग गर्भ गृह से थोड़ा बाहर है। इसके साथ ही मंदिर के बगल में अक्का-तंगी (बड़ी बहन-छोटी बहन) नाम के दो बड़े पत्थर से निर्मित कुएं भी हैं।

इन दोनों कुओं के भरने पर गर्भ गृह में दो से तीन फीट पानी भर जाता है। जब तक कुओं का पानी नीचे नहीं जाता तब तक मन्दिर का पानी नीचे नहीं जाएगा। ये यहां की विशेषता है।

इस तीर्थ की एक और विशेषता अक्का-तम्मन (बड़ी बहन-छोटा भाई) मंदिर है। ग्रामीणों का आग्रह है कि अब तीर्थ में मंदिरों और कुओं की मरम्मत की जिम्मेदारी धार्मिक बंदोबस्ती विभाग से संबंधित है। जिले के प्रभारी मंत्री एच.के. पाटिल के जिले में पर्यटन पर अधिक जोर देने की योजना बनाने के कारण इसमें लक्ष्मेश्वर के तीर्थ और मंदिर, बसदी (जैन मंदिर) और मस्जिद को शामिल करने की आवश्यकता है।

बाड़ लगाने का निर्णय लिया
उचित रखरखाव के अभाव में सैकड़ों साल पहले तराशी गई मूर्तियां अपना रंग खो रही हैं और पिछले साल लगातार बारिश के कारण अक्का-तम्मन मंदिर पूरी तरह से ढह गया है। वहीं मुख्य मंदिर का एक हिस्सा भी जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। पिछले साल इस मंदिर की दीवार ढह गई थी। साथ ही दोनों कुएं जर्जर हो चुके हैं और कुएं में लगे पत्थर टूट कर कुएं में गिर रहे हैं। सडक़ किनारे का कुआं पहले से ही आधे से अधिक क्षतिग्रस्त हो चुका है। श्रद्धालु कई बार तीर्थ के जीर्णोद्धार की मांग कर चुके हैं। अब नगर पालिका ने तीर्थ स्थल के चारों ओर तार की बाड़ लगाने का निर्णय लिया है।

फिर से आमंत्रित की जा रही है निविदा

वर्ष 2021-22 में 15वें वित्तीय में (फाइनांस) तार बाड़ समेत अन्य कार्यों के लिए 5.76 लाख रुपए की राशि रखी गई है। पहले भी दो बार निविदा आमंत्रित की गई है परन्तु किसी ने निविदा में भाग नहीं लिया है। इसके चलते अब एक बार फिर से निविदा आमंत्रित की जा रही है।

-शंकर हुल्लम्मनवर, मुख्य अधिकारी, नगर पालिका, लक्ष्मेश्वर