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नंगे पांव 3,000 किमी की आस्था यात्रा, साइकिल पर रामदेवरा की ओर बढ़ रहे 22 श्रद्धालु

आस्था जब संकल्प बन जाए तो मंजिल की दूरी मायने नहीं रखती। इसी विश्वास के साथ 22 श्रद्धालु चेन्नई से करीब 3,000 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर बाबा रामदेवरा धाम की ओर बढ़ रहे हैं। खास बात यह है कि सभी यात्री नंगे पांव यात्रा कर रहे हैं। उनका संकल्प है कि रामदेवरा पहुंचकर बाबा के दर्शन करने के बाद ही जूते-चप्पल पहनेंगे। चेन्नई से 2 अगस्त को रवाना हुआ बाबा रामदेवरा साइकिल यात्रा संघ-2026 का यह दल प्रतिदिन करीब 100 से 120 किलोमीटर साइकिल चलाकर आगे बढ़ रहा है। तमिलनाडु से कर्नाटक होते हुए यात्रा महाराष्ट्र और गुजरात से होकर राजस्थान पहुंचेगी। करीब 30 अगस्त तक रामदेवरा पहुंचने का लक्ष्य है।
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हुब्बल्ली में चेन्नई से रामदेवरा धाम की करीब 3,000 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का दल। साइकिलों को बाबा रामदेव के प्रतीक घोड़े और धार्मिक ध्वजों से सजाया गया है।

हुब्बल्ली में चेन्नई से रामदेवरा धाम की करीब 3,000 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं का दल। साइकिलों को बाबा रामदेव के प्रतीक घोड़े और धार्मिक ध्वजों से सजाया गया है।

पांचवीं बार साइकिल पर निकले विक्रम सिंहजोधा
यात्रा दल में जालोर जिले के रामा बाला निवासी विक्रम सिंह जोधा लगातार पांचवीं बार चेन्नई से रामदेवरा की साइकिल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 में यह यात्रा शुरू की थी और तब से हर साल बाबा रामदेव के प्रति आस्था के साथ इस यात्रा पर निकलते हैं। विक्रम सिंह के लिए यह केवल साइकिल यात्रा नहीं, बल्कि बाबा के प्रति श्रद्धा और विश्वास की यात्रा है। उनका कहना है कि बाबा रामदेव के प्रति गहरी आस्था और उनके चमत्कारों से मिली प्रेरणा ही उन्हें हर बार इतनी लंबी और कठिन यात्रा के लिए ऊर्जा देती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में यात्रा के दौरान एक कुत्ता भी उनके साथ रामदेवरा तक पैदल चला था।

बारिश में भी नहीं रुके कदम, चढ़ाई में साइकिल छोड़ पैदल चले
यात्रा की कठिनाइयों को याद करते हुए दल के सदस्य राहुल सिंह राजपुरोहित मादड़ी ने बताया कि कृष्णगिरी से चित्रदुर्ग के बीच कई जगह लगातार चढ़ाई मिली। स्थिति ऐसी बनी कि कुछ हिस्सों में साइकिल को पकड़कर पैदल चलना पड़ा। रास्ते में बारिश के दौरान भी कई बार भीगते हुए साइकिल चलानी पड़ी। यात्रियों की दिनचर्या भी आसान नहीं है। वे सुबह करीब 4 बजे उठते हैं। दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद सुबह 5 बजे साइकिल लेकर यात्रा पर निकल जाते हैं और दिनभर में 100 से 120 किलोमीटर तक का सफर तय करते हैं।

रास्ते में अजनबी नहीं, अपने मिलते हैं
इस यात्रा का सबसे भावुक पहलू रास्ते में मिलने वाला श्रद्धालुओं का अपनापन है। जिस शहर या गांव में दल का रात्रि विश्राम होता है, वहां बाबा रामदेव के भक्त यात्रियों का स्वागत करते हैं। कई स्थानों पर उनके रहने और भोजन की व्यवस्था भी श्रद्धालु ही करते हैं। विक्रम सिंह जोधा के अनुसार, लंबी यात्रा के दौरान रास्ते में मिलने वाला यह सेवा भाव और अपनापन यात्रियों की थकान कम कर देता है और अगले दिन फिर साइकिल उठाने का हौसला देता है।

तीन साइकिलों पर बाबा का कपड़े का घोड़ा
यात्रा दल में तीन साइकिलों पर बाबा रामदेव के प्रतीक स्वरूप कपड़े के घोड़े भी बांधे गए हैं। यह घोड़ा यात्रा की धार्मिक पहचान के साथ-साथ रास्ते में लोगों के आकर्षण का केंद्र भी बन रहा है। सभी यात्रियों को साइकिलें खींमल मैसाजी झोटा दादाल (जालोर), हाल बेंगलूरु की ओर से नि:शुल्क उपलब्ध करवाई गई हैं।

18 से 46 वर्ष तक के यात्री, अलग-अलग समाजों की भागीदारी
दल में सबसे कम उम्र के यात्री 18 वर्षीय कमलेश कुमार दाधीच हैं, जो नागौर जिले के गोटन निवासी हैं। वहीं सबसे अधिक उम्र के यात्री 46 वर्षीय रतनलाल सीरवी हैं, जो खोखरा निवासी हैं। अधिकांश यात्री व्यवसाय या नौकरी से जुड़े हैं और अपनी नियमित जिम्मेदारियों से समय निकालकर इस धार्मिक यात्रा में शामिल हुए हैं। दल में बालोतरा, जालोर, पाली, जोधपुर और नागौर जिलों के यात्री शामिल हैं। इनमें राजपूत, राजपुरोहित, सीरवी, पटेल, जैन, देवासी, भील, घांची, माली, सुथार, सेन, रावणा राजपूत और जाट समाज के सदस्य शामिल हैं। इस तरह यह यात्रा अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के लोगों को एक ही आस्था के सूत्र में जोड़ रही है।

25 सदस्यीय दल, साइकिलों की देखभाल के लिए दो मैकेनिक साथ
पूरे यात्रा दल में 25 सदस्य हैं। इनमें 22 साइकिल यात्री, एक वाहन चालक और दो साइकिल मैकेनिक शामिल हैं। करीब 3,000 किलोमीटर की लंबी यात्रा में साइकिलों में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को तत्काल दूर करने के लिए मैकेनिकों को दल के साथ रखा गया है।

हुब्बल्ली-धारवाड़ से बेलगावी होते हुए महाराष्ट्र की ओर
चेन्नई से शुरू हुई यात्रा बेंगलूरु, तुमकूरु, सिरा, हिरियूर, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, हावेरी के रास्ते हुब्बल्ली-धारवाड़ पहुंची। इसके बाद दल बेलगावी समेत कर्नाटक के अन्य शहरों से होते हुए महाराष्ट्र और गुजरात की ओर रवाना होगा।

रामदेवरा पहुंचने से पहले प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन
रामदेवरा पहुंचने से पहले दल राजस्थान के कई प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेगा। इनमें मुंडारा माता मंदिर, सोनाणा खेतलाजी मंदिर, आशापुरा माता मंदिर नाडोल, ओम बन्ना मंदिर चोटीला, राजाराम मंदिर शिकारपुरा धाम और जोधपुर का मसूरिया रामदेव मंदिर शामिल हैं।

दोबारा साइकिल पर लौटाती है आस्था
यात्रियों के लिए यह सफर सिर्फ हजारों किलोमीटर की दूरी तय करने का संकल्प नहीं है। नंगे पांव चलना, बारिश में भीगना, चढ़ाई में साइकिल छोड़कर पैदल चलना और रोजाना करीब 100 किलोमीटर का सफर—इन सभी कठिनाइयों के बीच रास्ते में मिलने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत उन्हें आगे बढऩे की ताकत देता है। विक्रम सिंह जोधा और उनके साथी मानते हैं कि मंजिल तक पहुंचने का रास्ता जितना कठिन है, बाबा रामदेव के प्रति उनकी आस्था उतनी ही मजबूत होती जाती है।