
घीसूलाल कटारिया
विभिन्न संस्थाओं में सक्रियता
धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा है। वे वर्ष 2002 से 2005 तक श्री वर्धमान स्थानकवासी समाज, हुब्बल्ली के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने मासखमण सहित 4 चौविहार अटाई जैसी कठिन धार्मिक साधनाएं भी कीं, जो उनके आध्यात्मिक जीवन की गहराई को दर्शाती हैं। समाजसेवा के क्षेत्र में भी उनका सफर प्रेरणादायक रहा है। वे वर्ष 1979 में विवेकानंद अस्पताल, हुब्बल्ली के उपाध्यक्ष रहे तथा लायंस क्लब ऑफ हुब्बल्ली के सक्रिय सदस्य भी रहे। दो वर्ष पूर्व उनके 80वें जन्मदिवस पर लायंस क्लब ने उनके सामाजिक योगदान के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया।
जनकल्याण कार्यों में निरंतर सहयोग
कटारिया पांच वर्षों तक सिद्धारूढ़ स्वामी मठ ट्रस्ट के उपाध्यक्ष भी रहे। मठ परिसर में उन्होंने अपने निजी खर्च से एक प्याऊ का निर्माण करवाया। इसके अलावा विभिन्न जगहों पर मंदिर निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, गौसेवा और अन्य जनकल्याण कार्यों में वे निरंतर सहयोग करते रहे हैं। वे मरुधर जैन संघ के ट्रस्टी भी रह चुके हैं और हुब्बल्ली में हिंदी स्कूल के संचालन एवं विकास में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
नि:स्वार्थ आयुर्वेद सेवा
उनकी सबसे बड़ी पहचान उनकी नि:स्वार्थ आयुर्वेद सेवा है। पिछले पांच दशक से अधिक समय से वे लोगों का आयुर्वेदिक उपचार कर रहे हैं और न केवल परामर्श, बल्कि आयुर्वेदिक दवाइयां भी नि:शुल्क उपलब्ध कराते हैं। उनका मानना है कि समाजसेवा किसी प्रसिद्धि के लिए नहीं, बल्कि मन की संतुष्टि के लिए होनी चाहिए।
समाजहित के कार्यों से नई पहचान
उनके पिता हीराचंद कटारिया राजस्थान से हुब्बल्ली आए थे और यहां कपड़े के व्यवसाय की शुरुआत की थी। परिवार की उसी कर्मभूमि को घीसूलाल कटारिया ने सेवा, संस्कार और समाजहित के कार्यों से नई पहचान दी। आज 82 वर्ष की आयु में भी उनकी सक्रियता, सरलता और सेवा भावना यह संदेश देती है कि सच्चा जीवन वही है, जो दूसरों के काम आए। अनेक सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित घीसूलाल कटारिया वास्तव में परदेश में राजस्थानी समाज का गौरव और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं।
Updated on:
09 Jun 2026 07:31 pm
Published on:
09 Jun 2026 07:26 pm
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