शक्ति योजना : मारिकांबा मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या दस हजार प्रतिदिन तक पहुंचीअन्न प्रसाद के लिए बन रही भीड़ की स्थिति03 से 4 हजार श्रद्धालु रोजाना आते हैं आम दिनों में 10 हजार पार श्रद्धालु त्योहार और विशेष अवसरों पर 40 से अधिक कर्मी जुटे हुए हैं मंदिर में भोजन बनाने में
शक्ति योजना : मारिकांबा मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या दस हजार प्रतिदिन तक पहुंची
अन्न प्रसाद के लिए बन रही भीड़ की स्थिति
03 से 4 हजार श्रद्धालु रोजाना आते हैं आम दिनों में
10 हजार पार श्रद्धालु त्योहार और विशेष अवसरों पर
40 से अधिक कर्मी जुटे हुए हैं मंदिर में भोजन बनाने में
जाकिर हुसैन पट्टनकुड़ी
हुब्बल्ली. सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा के चलते महिलाओं की संख्या बढ़ी है और राज्य सरकार की ओर से शक्ति योजना का असर धार्मिक स्थलों पर दिखने लगा है। इसी क्रम में उत्तर कन्नड़ जिले के सिरसी स्थित मारिकांबा मंदिर में अन्न प्रसाद विभाग के लिए भारी मांग बड़ी है, इसकी वजह से पाकशाला में कर्मचारियों की वृद्धि अनिवार्य हुई है। राज्य के शक्तिपीठों में से एक सिरसी के मारिकांबा मंदिर में आम दिनों में करीब एक हजार श्रद्धालु आते थे। त्योहारों और विशेष अवसरों के दौरान 5-8 हजार श्रद्धालुओं के लिए अन्न दसोहा (महाप्रसादी) का आयोजन किया जाता था परन्तु शक्ति योजना लागू होने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।
सामान्य दिनों में भी तीन हजार से चार हजार श्रद्धालु पहुंचते हैं और अन्न प्रसाद ग्रहण करते हैं। देवी के विशेष दिन मंगलवार और शुक्रवार को यह संख्या दस हजार के पार हो जाती है और अन्न छत्र में भोजन के लिए भीड़ की स्थिति बन रही है।
अतिरिक्त कर्मचारी तैनात
मंदिर प्रमुख का कहना है कि आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अन्न प्रसाद तैयार करने के लिए मंदिर के रसोई विभाग में आधुनिक सुविधाएं प्रदान की गई हैं। पीने का साफ पानी, पहले से ही बॉयलर की व्यवस्था होने से चावल पकाने में कोई बड़ी समस्या नहीं हो रही है। इस व्यवस्था में 40 से अधिक कर्मी जुटे हैं। श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने पर मंदिर के अन्य विभागों से अतिरिक्त कर्मचारी तैनात किए जा रहे हैं।
गुणवत्ता वाला भोजन : भोजन के लिए कतार की व्यवस्था है और श्रद्धालुओं को अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन परोसा जा रहा है। लंच का समय जो पहले 2 बजे तक था उसे बढ़ाकर 12 बजे से 3 बजे तक कर दिया गया है। ज्यादा श्रद्धालु हों तो 4 बजे जाएं तो भी कोई आश्चर्य की बात नहीं है। पाक शाला के एक प्रमुख ने बताया कि पहले, स्थानीय श्रद्धालुओं की संख्या अधिक थी, जबकि बाहरी शहरों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम थी। अधिकांश श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर लौट जाते थे परन्तु अब बाहरी जिले से भी श्रद्धालु काफी संख्या में आ रहे हैं। जो भी लोग अपने परिवार के साथ आते हैं वे अन्न प्रसाद ग्रहण करके ही जाते हैं।
श्रद्धालुओं की सेवा में कोई परेशानी नहीं
दिन-ब-दिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती जा रही है। उत्तर कर्नाटक के अधिकांश जिलों से श्रद्धालु अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। रसोई विभाग में अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है। अब आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा में कोई परेशानी नहीं हो रही है। श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने पर कर्मचारियों की संख्या बढ़ना लाजमी है।
-चंद्रकांत नायक, प्रबंधक, मारिकांबा मंदिर, सिरसी
भूखा नहीं सोना चाहिए श्रद्धालु
भगवान के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भूखा नहीं सोना चाहिए। इसके चलते मंदिर में अन्न छत्र (लंगर) कार्यरत था। वर्तमान प्रबंधन बोर्ड भी इसी उम्मीद को कायम रखने के लिए प्रयासरत है।
-आरजी नायक,अध्यक्ष, मंदिर प्रबंधन बोर्ड, मारिकांबा मंदिर,
प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा
भगवान के दर्शन के बाद प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा है। इस कारण चाहे कितनी भी भीड़ हो, अन्ना प्रसाद प्राप्त करके ही जाएंगे।
-मेघना जमखंडी, श्रद्धालु