
23 साल की शुभी की ट्रैफिकिंग पर फिदा हुए इंदौरियंस, खुद कहते हैं, आज मैंने हेलमेट पहनी है मैडम
इंदौर. 5 फुट 5 इंच की हाइट.. सडक़ों पर बिजली की तरह दौड़ते पांव और चेहरे पर कमाल का आत्मविश्वास। जी हां.. हम बात कर रहे हैं 23 साल की मैनेजमेंट छात्रा शुभी जैन की। शुभी इन दिनों अपने ट्रैफिक मैनेजमेंट स्टाइल को लेकर चर्चा में हैं। देशभर में डांसिंग कॉप के नाम से मशहूर ट्रैफिक पुलिस के सिपाही रणजीत की स्टाइल की तरह ही शुभी का भी ट्रैफिक कंट्रोल करने का अपना स्टाइल है। हेलमेट पहनने के लिए शुक्रिया सर! कल से हेलमेट जरूर लगाइएगा..हमें खुशी होगी, सीट बेल्ट बांधिए सर..अच्छा लगता है.. जैसे निवेदन और आभार पूर्ण शब्दों को एक खास तरीके से लोगों को समझाकर शुभी ने इंदौरियंस का दिल जीत लिया है। बेबाक और बेहतरीन शुभी से पत्रिका की खास बातचीत...
डर से नहीं दिल से करें ट्रैफिक नियमों का पालन...दुनिया आपको फॉलो करेगी
इंदौर के लोग ट्रैफिक पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए हेलमेट, सीट बेल्ट एवं अन्य नियमों को डर से मानते हैं। डर कर किसी काम को करना ठीक नहीं है। आप इसे अपने व्यवहार में लाएं ताकि दुनिया आपका अनुसरण (फॉलो) करे। लोग आपको आदर्श (आइडियल) मानें। मुझे लगता है लोगों में स्वअनुशासन (सेल्फ डिसिप्लीन) की कमी है। मैं रोज 16 लोगों की टीम के साथ हाईकोर्ट तिराहे और इंद्रप्रस्थ चौराहे पर शाम 5 बजे से 8 बजे तक ट्रैफिक सुधार के लिए काम कर रही हूं। बीते कुछ दिनों में जिन लोगों को वे सीट बेल्ट और हेलमेट पहनने की गुजारिश कर चुकी हूं। अब वे भी सिगनल पर मुस्कारते हुए उन्हें नियम का पालन करने की बात कह रहे हैं। यह देखकर अच्छा लगता है। शहर में बड़ी संख्या में युवा पढऩे आते है। युवाओं से मेरी अपील है कि ट्रैफिक सुधार के लिए किसी को अपना आदर्श न बनाए बल्कि खुद एेसा बन जाएं की दुनिया आपको अपना आदर्श माने। पुणे में पढ़ाई के पहले दो साल शहर में रह चुकी हूं। रणजीत सर को लोग डांसिंग कॉप और सिंघम कहकर पुकारते है। मेरी उनसे तुलना सही नही है। ट्रैफिक मैनेेजमेंट करने के लिए मेरा अपना स्टाईल है। मैं खुशनसीब हूं की मेरी आदत रणजीत सर से मिलती जुलती है। उनको मेरा धन्यवाद।
इंदौर में १८०० बच्चे ट्रैफिक सुधार के लिए काम कर रहे हैं। वे हर रोज अपने जीवन के तीन घंटे देश के ट्रैफिक सुधार के लिए दे रहे है। उन सभी को धन्यवाद।
दो साल पहले शुभी से मिला : रणजीत
दो साल पहले शुभी से मिला था। उसने मेरे काम को सराहाते हुए मुझ जैसा बनने की बात कही थी। लेकिन उस वक्त वह पढ़ रही थी। हाल ही में पुणे से आने के बाद उसने ट्रैफिक सुधार में योगदान देने की बात कही। शुभी की तरह युथ इस अभियान से जुड़ सकते है। जैसे बुराई को बुराई देखकर पनपती है वैसे अच्छाई को अच्छाई देखकर पनपती है इस कहावत को शुभी ने सिध्द कर बताया है।- रणजीत सिंह, ट्रैफिक कॉप
Published on:
17 Nov 2019 01:53 am
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