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मन्नत पूरी होने पर यहां श्रद्धालु काटकर चढ़ाते हैं जीभ, ड़ेढ हजार महिलाएं कर चुकी हैं ये काम, नहीं होता दर्द

मन्नत पूरी होने पर यहां श्रद्धालु काटकर चढ़ाते हैं जीभ, ड़ेढ हजार महिलाएं कर चुकी हैं ये काम, नहीं होता दर्द

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navratri 2018

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इंदौर। पूरे मध्य प्रदेश में शारदीय नवरात्रि की धूम तेजी से मची हुई है जिसमें भक्तजन नौ दिनों तक पूजा कर मां दुर्गा की कृपा प्राप्त कर रहे हैं। आपको बता दें कि शरद ऋतु में आने वाले आश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है। साल में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें से दो गुप्त नवरात्र होते हैं लेकिन चैत्र और आश्विन माह के नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। आश्विन नवरात्र को महानवरात्र भी कहा जाता है। इसका एक कारण यह भी है कि ये नवरात्र दशहरे से ठीक पहले पड़ते हैं।

नवरात्रि में देवी-देवताओं के प्रति लोगों की असीम श्रद्धा होती है। इन्हीं भावों के चलते भगवान के दरबार में सोना-चांदी, धन और धान्य समेत अनेक वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं। प्रदेश में कई देवी-देवताओं के ऐसे मंदिर हैं, जहां पर बलि भी दी जाती है। बलि देने के साथ ही कई ऐसे मंदिर भी है जहां पर लोग शरीर के अंग ही काटकर चढ़ा देते हैं। जानिए मध्य प्रदेश में कौन सा है वह मंदिर....

इस मंदिर में श्रद्धालु चढ़ाते हैं जीभ

इंदौर शहर में स्थित अंतरी माता के मंदिर में लोग अपनी मन्नत के पूरा होने पर अपनी जीभ को काटकर चढ़ा देते है। बताया जाता है कि हर साल यहां पर नवरात्रि के समय 18 से 19 महिलाएं देवी को जीभ चढ़ाती है। ये सिलसिला बीते 101 साल से लगातार होता आ रहा है। बताया जा रहा है कि आंतरी का मंदिर करीब 700 वर्ष पुराना है। जगत जननी जगदम्बा दक्षिण दिशा से नदी के हनुमान घाट से मंदिर में आकर विराजमान हुई थीं।

आज भी है पदचिह्न

यहां के पुराने लोग बताते है कि मंदिर में हनुमान घाट के पत्थर पर आज भी मां के वाहन का पदचिह्न अंकित है। साथ ही दूसरा पदचिह्न मंदिर के अंदर भी बना हुआ है। मंदिर में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं और मन्नतें मांगते हैं। मन्नत मांगने पर श्रद्धालु जीभ काटकर चढ़ाते हैं। यह परंपरा करीब 700 साल से चली आ रही है। पहले ये कम होता था लेकिन धीरे-धीरे मान्यता बढ़ने पर लोगों के जीभ चढ़ाने के सिलसिला बढ़ गया है।

कटी हुई जुबान आ जाती है वापस

कहा ये भी जाता है कि देवी की शक्ति से जीभ चढ़ाने के बाद श्रद्धालु की जीभ वापस आ जाती है। मंदिर के पुजारी भारतसिंह बताते हैं कि नौ दिन यहां पर लोगों की बहुत ज्यादा भीड़ होती है। हर साल यहां पर ऐसा ही मेला लगता है। मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन ही तीन से चार महिलाएं चीभ चढ़ा चुकी है।