
आचार्य विजय कीर्तियश सूरिश्वर महाराज ने नृसिंह वाटिका में सोमवार को अपने गुरु गुणयश सूरिश्वर महाराज की गुणानुवाद सभा के दौरान कही।
इंदौर. व्यक्ति चाहता कुछ और है और उसके जीवन में होता कुछ और हैं। संसार में घटित हर घटना अपनी इच्छा अनुसार नहीं होती है। जीवन में मुझे जो पसंद था वह चाहकर भी मैं पा नहीं सका। लेकिन मेरे जीवन में ऐसे गुरु मिले, जिन्होंने मुझे आत्म उत्थान के मार्ग पर ले ओ। सच्चा गुरू वहीं होता है जो शिष्य के जीवन को आत्म उत्थान तथा मुक्ति के मार्ग पर ले जाए। जिसके हृदय में गुरु के प्रति सच्चा समर्पण और श्रद्धा होती है वहीं सच्चा शिष्य होता है।
यह बातें आचार्य विजय कीर्तियश सूरिश्वर महाराज ने नृसिंह वाटिका में सोमवार को अपने गुरु गुणयश सूरिश्वर महाराज की गुणानुवाद सभा के दौरान कही। उन्होंने गुणयश सूरिश्वर महाराज की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों का शिक्षक बड़ों को पढ़ाने में असमर्थ होता है। शहर का टीचर गांव में पढ़ाने में असमर्थ होता है लेकिन मेरे गुरु ऐसे थे कि वे बाल, युवा और वृद्ध साधुका समान रूप से शिक्षित करने में कुशल थे। हर शिष्य की भावना होना चाहिए कि वह गुरु के बताए मार्ग पर चले, अगर गुरु की शिक्षा के बाद भी वह गुरु के बताए मार्ग पर नहीं चल पाता है तो यह शिष्य का दोष है गुरु का नहीं। जैनश्रीसंघ चातुर्मास समिति से जुड़े मनीष शाह ने बताया कि सोमवार सुबह के सत्र में आचार्य विजय कीर्तियश और उनके 108 साधु-साध्वियों के सान्निध्य में नृसिंह वाटिका में गुणानुवाद सभा और आयंबिल का आयोजन किया गया है। जिसमें पूरे प्रदेश से 500 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं शामिल होकर सामूहिक रूप से आयंबिल में शामिल हुए। गुणयश सूरिश्वरजी के स्वर्गवास दिवस पर नृसिंह वाटिका में उनके जीवनवृत्त पर आधारित चित्रमय झांकी भी प्रस्तुत की गई। दोपहर के सत्र में सामूहिक वर्धमान तप ओली का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
Published on:
09 Oct 2017 07:40 pm
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