
स्त्री रोग व प्रसूति विशेषज्ञों की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में बोलीं विशेषज्ञ, पहले दिन कॉस्मेटिक गायनेकोलॉजी विषय पर दी जानकारी
इंदौर. बदलती जीवनशैली और निरंतर शारीरिक बदलावों के कारण महिलाओं में जननांगों का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है। कुछ युवतियों व महिलाओं में तो प्रसूति के लिए भी समस्याएं आ रही हैं। फिलहाल कुछ ऐसे मामले में भी सामने आए है, जिसमें जननांग प्रसूति के लिए तैयार नहीं है या बच्चादानी बनने के बावजूद प्रसूति के लिए रास्ता नहीं बनता। ऐसे में महिलाओं को वैवाहिक जीवन में भी खासी परेशानी होती है। कुछ मामलों में तो बात तलाक तक पहुंच गई है। वर्तमान में तकनीक की मदद से इस तरह के केस को ऑपरेशन के जरिए हल किया जा रहा है। इस तरह के ऑपरेशन को विजायनोप्लास्टी नाम दिया गया है। अब तक कई महिलाएं इस तरह के ऑपरेशन करवा चुकी हैं।
यह बात दिल्ली से आई स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपिंदर रूपराय ने वेजिनेटल कॉस्मेटोलॉजी विषय पर प्रकाश डालते हुए कही। मप्र स्त्री रोग व प्रसूति विशेषज्ञ एसोसिएशन व इंदौर की महिला विशेषज्ञों ने एएमपीओजीएस आईओजीसीओएन 2017 का आयोजन एमजीएम मेडिकल कॉलेज व एमवायएच के तत्वावधान में शनिवार को होटल रेडिसन में किया।
संस्थागत प्रसूति है जरूरी
केरल से आईं डॉ. एन राजामाहेश्वरी ने यूरोगायनेकोलॉजी विषय पर कहा कि सामान्य प्रसूति के दौरान जननांगों में होने वाली क्षति आम बात हो गई है। सामान्यत: देखा गया है कि 10 में से 5 या 6 महिलाएं इस तरह की क्षति का शिकार होती हैं। कई बार तो प्रसूता की जान तक खतरे में पड़ जाती है। इस क्षति से बचने के लिए महिलाओं को गर्भवास्था में योगा, व्यायाम सहित आयरन व कैल्शियम के साथ स्त्री रोग विशेषज्ञों से भी आवश्यक सलाह लेना चाहिए। इस तरह की क्षति से बचने के लिए संस्थागत प्रसव सबसे ज्यादा जरूरी है। जननी सुरक्षा योजना का उद्देश्य भी संस्थागत प्रसूति को बढ़ावा देने के लिए ही किया गया है।
ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. ब्रजबाला तिवारी व डॉ. अनुपमा दवे ने बताया कि रविवार को देश-विदेश से आए ख्यातनाम विशेषज्ञों के व्याख्यान होंगे।
Published on:
25 Nov 2017 09:03 pm
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