Ashadha Gupt Navratri 2025: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रि हर साल दो बार मनाई जाती है, एक बार माघ मास में और दूसरी बार आषाढ़ मास में। आषाढ़ माघ में आने वाली यह नवरात्रि मुख्य रूप से तांत्रिकों व साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
Ashadha Gupt Navratri 2025: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार गुप्त नवरात्रि हर साल दो बार मनाई जाती है, एक बार माघ मास में और दूसरी बार आषाढ़ मास में। आषाढ़ माघ में आने वाली यह नवरात्रि मुख्य रूप से तांत्रिकों व साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस उत्सव को लेकर शहर के विभिन्न मां दुर्गा के मंदिरों में विशेष गुप्त अनुष्ठान और पूजा-अर्चना की जाएगी।
पुजारी पं. गुलशन अग्रवाल के मुताबिक अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार माघ नवरात्रि जनवरी-फरवरी के महीनों के दौरान मनाई जाती है, जबकि आषाढ़ नवरात्रि जून-जुलाई के महीने में आती है। इस बार की आषाढ़ नवरात्रि गुरुवार से शुरू होने जा रही है। गुप्त नवरात्रि के दौरान गुप्त रूप से देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों को ‘शक्ति’ के रूप में पूजा जाता है।
पं. अग्रवाल के मुताबिक इस त्योहार के दौरान भक्त देवी की पूजा कर अपनी इच्छाओं को पूरा कर सकते हैं, लेकिन अनुष्ठानों को गुप्त रखने की आवश्यकता होती है, क्योंकि पूजा की सफलता इसके पीछे गोपनीयता पर निर्भर करती है। चैत्र और आश्विन मास के नवरात्रि(Ashadha Gupt Navratri 2025) में देवी प्रतिमा स्थापित कर मां दुर्गा की आराधना अखंड ज्योति प्रज्वलित कर या जवारे की स्थापना कर की जाती है।
इस नौ दिवसीय धार्मिक क्रिया के दौरान देवी दुर्गा को प्रसन्न करने का मुख्य तरीका तंत्र विद्या के मंत्रों के साथ देवी के शक्तिशाली आह्वान को मंत्रमुग्ध करना है। गुप्त नवरात्रि के दौरान पूजा की सबसे प्रसिद्ध विधि तांत्रिक विद्या है, जिसमें धन, बुद्धि और समृद्धि प्राप्त करने के लिए देवी आराधना की जाएगी।
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देवास नाका स्कीम 114 स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर, मां जगवंती देवी धाम पर गुप्त नवरात्रि के उपलक्ष्य में गुरुवार से नौ दिनों अनुष्ठान किए जाएंगे। 4 जुलाई तक नियमित रूप से प्रतिदिन सुबह 6 से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 से रात 11 बजे तक विभिन्न आयोजन होंगे। मंदिर के प्रमुख पं. शिवनारायण पाठक ने बताया, गुप्त नवरात्रि में प्रतिदिन दोनों समय नित्य नूतन शृंगार, पूजन और अभिषेक का क्रम चलेगा। भक्तों की सुविधा के लिए अभिषेक एवं पूजा-अर्चना के विशेष प्रबंध किए गए हैं।