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देवास. बैंक नोट प्रेस में जनवरी में उजागर हुई लाखों की चोरी के तार जीएम तक पहुंचते दिख रहे हैं। एक महीने से अधिक जांच के बाद बीएनपी के महाप्रबंधक एमसी वैलप्पा को भी निलंबित कर दिया गया। उनका कार्य अब प्रतिभूति कागज कारखाना, होशंगाबाद के जीएम टीआर गौड़ा देखेंगे। सूत्रों के अनुसार वैलप्पा ने ही रिजेक्टेड नोटों में वाटर मार्क और नंबरिंग के स्थान पर पंचिंग बंद करने के आदेश दिए थे। वैसे वैलप्पा का करियर विवादित रहा है। देवास में उनका दूसरा कार्यकाल था। इससे पहले वर्ष 2010-11 में प्रेस में इनके खिलाफ हुए आंदोलन के बाद इनका ट्रांसफर कोलकता कर दिया गया था।
पत्रिका की खबर पर फिर लगी मुहर
बीएनपी, देवास के वरिष्ठ पर्यवेक्षक मनोहर वर्मा को १९ जनवरी २०१८ को नोटों की चोरी करते हुए रंगेहाथों पकड़ा गया था। तलाशी में उनके पास से ९०.५ लाख के नोट बरामद हुए थे। इसके बाद हुई लंबी जांच के बाद कई अधिकारियों व कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन जीएम पर कार्रवाई नहीं हो रही थी। इंक कारखाने में हुई गड़बडिय़ों को पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। पत्रिका में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद आखिरकार शनिवार को वैलप्पा पर कार्रवाई की गई।
हाई सिक्यूरिटी वाले बैंक नोट प्रेस में शुक्रवार को बड़ा मामला सामने आया। बीएनपी के कंट्रोल सेक्शन के डिप्टी कंट्रोल ऑफिसर मनोहर वर्मा को सीआईएसएफ ने रिजेक्ट नोट चुराकर ले जाते हुए रंगे हाथ पकड़ा। इसके बाद उसे बीएनपी पुलिस के हवाले कर दिया। करीब 26 लाख स्र्पए ऑफिस और 64.50 लाख स्र्पए आरोपी के घर से जब्त हुए। बीएनपी पुलिस ने आरोपी को 22 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर लिया है।
असल में इससे पहले बीएनपी पुलिस ने सीआईएसएफ और बीएनपी के वरिष्ठ अफसरों की उपस्थिति में जब आरोपी वर्मा की तलाशी ली थी, तो उसके जूते में से 200 स्र्पए के रिजेक्ट नोट की दो गड्डियां मिली थी। उसके दराज और अन्य लकड़ी के बक्से से 26 लाख 9 हजार 300 स्र्पए के रिजेक्ट नोट जब्त हुए। रुपए जब्त कर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद बीएनपी स्थित आरोपी के ऑफिस से रुपए मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी के साकेत नगर स्थित मकान पर दबिश दी। यहां से पुलिस को 64.50 लाख रुपए के रिजेक्ट नोट मिले थे।
तीन महीने से कर रहा था चोरी
उधर आरोपी से जब मीडिया ने पूछा कि वह कब से यह काम कर रहा है तो आरोपी का कहना था कि वह अप्रैल से इस सेक्शन में आया था और करीब तीन माह से चोरी कर रहा था। शर्ट और जूते के अंदर नोटों की गड्डियां छुपाकर ले जाता था। जब भी उसे मौका मिलता वह गड्डी उठा ले जाता। इस दौरान आरोपी ने मीडिया को जूते खोलकर बताया कि किस तरह वह रुपए जूते में रखता था।
क्लर्क के पद पर हुआ था भर्ती
सूत्रों के अनुसार मनोहर वर्मा 1984 में बीएनपी में बतौर क्लर्क भर्ती हुआ था। वह पहले कंट्रोल सेक्शन में न होकर प्रिंटिंग सेक्शन में था। इसके बाद बीएनपी में पद खाली हुए और 25 प्रतिशत कोटा पदोन्न्ती के लिए रखा गया तो मनोहर वर्मा को कंट्रोल विभाग में एसिस्टेंट इंस्पेक्टर बना दिया गया। इसके बाद बीएनपी कॉर्पोरेशन में चला गया। इस दौरान कुछ कर्मचारी कॉर्पोरेशन में चले गए तो कुछ केंद्र सरकार के अधीन रहे। कुछ ने वीआरएस ले लिया। ऐसे में फिर पद खाली हुए और वर्मा को इसका फायदा मिला। इसके बाद वह प्रमोशन पाकर डिप्टी कंट्रोल ऑफिसर के पद तक पहुंच गया।
प्रोसेस होने के बाद गड़बड़ पकडऩा मुश्किल
सूत्रों की माने तो बीएनपी में सीआईएसएफ की हाई सिक्यूरिटी होती है। जहां घटना हुई वहां भी भारी सुरक्षा व्यवस्था रहती है। लेकिन रिजेक्टेड नोट जब मशीन पर नष्ट करने के लिए ले जाए जाते हैं तो वहां यह गड़बड़ पकडऩा सीआईएसएफ के लिए भी मुश्किल है। सूत्रों की माने तो कंट्रोल विभाग के नोट साइड सेक्शन में रिजेक्ट नोट को नष्ट करने के लिए एक सिस्टम बनाया हुआ है। इसके तहत नोटों की संख्या का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है और इसके बाद उसे नष्ट करने के लिए प्रोसेस किया जाता है। नोट नष्ट करने के लिए मशीन चालू होने के बाद नष्ट होने से पहले कोई अगर नोट उठा लेता है तो यह गड़बड़ सामने नहीं आती है और उन नोटों को रिकॉर्ड में नष्ट मान लिया जाता है।
क्या होते हैं रिजेक्ट नोट
बीएनपी सूत्रों के अनुसार किसी भी नोट की छपाई के दौरान अगर उसकी सीरिज का कोई अंक ऊपर नीचे हो, उसकी स्याही फैल गई हो या अन्य कोई गड़बड़ हो तो उसे आरबीआई ने रिजेक्ट नोट मानता है। यह गड़बड़ केवल बीएनपी की मशीनें ही पकड़ पाती है। इसके बाद इसे रिजेक्ट नोट की श्रेणी में मान लिया जाता है और प्रोसेस कर उन्हें नष्ट कर दिया जाता है। आम व्यक्ति, बैंक और दुकानदार इस गड़बड़ को नहीं पकड़ पाते हैं।
नहीं उतरवाते हैं अफसरों के जूते और कपड़े
बीएनपी में नोट साइड सेक्शन के हर कर्मचारी की सख्त चैकिंग होती है। जो भी कर्मचारी बाहर आता है उसके पेंट-शर्ट और जूते उतरवाकर चैकिंग होती है। इस दौरान सुपर वाइजर की भी चैकिंग होती है लेकिन उनके जूते और पेंट-शर्ट नहीं उतरवाए जाते हैं। केवल ऊपर से ही उनकी चैकिंग होती है। इसी का फायदा आरोपी वर्मा ने उठाया।
Published on:
25 Feb 2018 12:35 pm
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