इंदौर. हीरा नगर इलाके से अपहरण कर आरोपित मासूम पायल की बलि देना चाहते थे। इसके लिए परिवार भोपाल में एक बाबा के संपर्क में था। पुलिस यदि समय रहते पायल को नहीं खोज पाती, तो अमावस्या पर बच्ची की बलि दे दी जाती।
एसपी अवधेश गोस्वामी ने बताया कि भोपाल से रविवार पायल (8) पिता दीपक सोलंकी निवासी स्वास्थ्य नगर के अपहरण मामले में आरती सेन, उसकी मां मुन्नीबाई सेन, बहन सपना, भाई विजय को गिरफ्तार कर रविवार रात इंदौर लाए। सोमवार को चारों को कोर्ट में पेश कर पुलिस ने दो दिन के रिमांड पर लिया है। भोपाल में न्यू मार्केट इलाके से आरती पुलिस के हाथ लगी, लेकिन उसने पायल के बारे में जानकारी होने से मना कर दिया। अपने परिवार के भी इंदौर में होने की बात कही। जब पुलिस ने कहा कि बच्ची को ले जाते समय एक बच्चे ने उसे देखा था, तो परेशान नजर आई। इसी के बाद पास के ही एक मंदिर से आरती के परिजन भी पुलिस को मिल गए। सभी से अलग-अलग पूछताछ की तो बयान में विरोधाभास सामने आया। इसके बाद पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो सभी टूट गए।
पूछताछ में जानकारी मिली कि पिता देशराज सिंह सेन के लापता होने में संदेही पंकज गुर्जर निवासी नगीन नगर पर ही वो बच्ची के भी अपहरण का आरोप लगा देते। उसकी पायल के चाचा प्रमोद से दोस्ती है। इसी का फायदा उठाकर वो पंकज का नाम बताकर परिवार से शिकायत करवाना चाहती थी। इसके बाद पुलिस उस पर कार्रवाई करती और इससे पिता देशराज के बारे में भी जानकारी मिल जाती।
बाइक पर ले गए भोपालआरती सप्ताह पहले से रैकी कर रही थी।वह देखना चाहती थी कि पायल उसके साथ सामान्य रहती है या हंगामा करती है। घटना वाले दिन बच्ची को आरती ने कुरकुरे व टॉफी दिलवाई। रिक्शा से उसे लेकर विजय नगर पहुंची। यहां से बस से देवास गए। देवास में बाइक लेकर भाई विजय मौजूद था, जिससे वे पायल को लेकर भोपाल पहुंचे। मां व बहन पहले ही बस से भोपाल चले गए थे। परिवार किराए पर लिए मकान की बजाय एक धर्मस्थल पर रुका था।
दीदी बोली, पीछे लगे हैं गुंडेघर के पास दीदी मिली... उन्होंने पानीपूरी खाने चलने को कहा। रिक्शा से एक जगह गए, वहां से एक बस में बैठे। मैंने बस में पूछा कहां जा रहे हैं दीदी... तो बोली गार्डन। एक जगह उतरे तो वहां बाइक से भैया आ गए। फिर हम उनके साथ बैठ गए। रास्ते में एक जगह कचौरी खिलाई। बहुत देर तक गाड़ी चलती रही तो मैंने दीदी से घर चलने के लिए कहा...वो बोली...हमारे पीछे गुंडे लगे हैंै। इसके बाद वो एक घर ले गए। यहां रात में कुरकुरे खिलाफ दीदी ने अपने पास रजाई में सुला लिया। रात में दादा-दादी की याद आने लगी, तो दीदी ने अगले दिन सुबह चलने की बात कही। सुबह बेक समोसा खिलाकर उसे घर छोड़कर सब चले गए। कुछ देर बाद आए और एक मंदिर ले गए। फिर घर पर छोड़कर चले गए। अकेले होने पर मैं रोने लगी तो एक महिला आई और बोली तुम घर में ही रहना। बाद में दीदी-भैया आए तो उनसे घर चलने की जिद की। वो कहने लगे कि आसपास हमें गुंडे ढूंढ रहे हैं। वो हट जाए फिर हम घर चलेंगे। घर में खेल रही थी, तब पुलिस अंकल आ गए और मुझे साथ ले आए।
- जैसा मासूम पायल ने बताया