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इस तस्वीर के जरिये सोशल मीडिया पर CM शिवराज से तक मांगी गई थी बच्चों के लिये मदद, पुलिस ने जांच के बाद उठाया सराहनीय कदम

लॉकडाउन में इंदौर पुलिस का एक बार फिर सराहनीय कदम देखने को मिला है। पुलिस के इस कदम की न सिर्फ शहर में मौखिक चर्चाए हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी खास सराहना की जा रही है।

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इस तस्वीर के जरिये सोशल मीडिया पर CM शिवराज से तक मांगी गई थी बच्चों के लिये मदद, पुलिस ने जांच के बाद उठाया सराहनीय कदम

इंदौर/ मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस आए दिन अपनी ड्यूटी के साथ साथ सेवा भावी कार्यों के कारण चर्चाओं में बनी रहती है। अगर लॉकडाउन की ही बात करें, तो शहरवासियों की मदद करने, उन्हें उनके ठिकानों तक छोड़ने और इलाज कराने जैसे काम पुलिस ने अपनी ड्यूटी से अलग होकर मानव सेवा के लिये अब तक किये, जिनकी चर्चा खबरों के माध्यम से अब तक कई बार हो चुकी है। संकट की इस घड़ी में लगे लॉकडाउन में इंदौर पुलिस का एक बार फिर सराहनीय कदम देखने को मिला है। पुलिस के इस कदम की न सिर्फ शहर में मौखिक चर्चाए हैं, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसकी खास सराहना की जा रही है।

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सोशल मीडिया पर वायरल इस तस्वीर के लिये सीएम शिवराज तक से मांगी गई मदद

दरअसल, पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर ने लोगों का खासा ध्यान अपनी ओर खींचा। तस्वीर इंदौर के एचडीएफसी बैंक के बाहर की बताई गई, जिसमें लॉकडाउन के दौरान दो बच्चे फल बेचते दिखाए गए। सोशल मीडिया पर दिखाई जा रही तस्वीर को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी टेग किया गया। साथ ही, उन बच्चों की मदद के लिये गुहार लगाई गई। हालांकि, मामला जब इंदौर पुलिस और प्रशासन के संज्ञान में आया, तो उनकी ओर से कराई गई जांच में कुछ और ही सामने आया।


तस्वीर में आधी सच्चाई और आधा भ्रम

जांच में पता चला कि, फोटो इंदौर के DRP लाइन पर स्थित HDFC बैंक के सामने का और लॉकडाउन की अवधि का जरूर है, लेकिन फल बेचने वाले बच्चे नहीं बल्कि तस्वीर में दिखाई दे रहे लड़के के पिता हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि, जिस समय ये तस्वीर ली गई, उस समय फल बेचने वाला व्यक्ति नजदीक ही शौच के लिये गया था। इस दौरान नजदीक ही खेल रहा फल बेचने वाले युवक का बेटा और पास में रहने वाले एक फोटोग्राफी ट्रेनर की बेटी फलों के पास बैठ गई।

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पिता के हटने पर खेलते हुए फलों की टोकरी के पास आकर बैठ गए थे बच्चे

दरअसल, सीएम शिवराज तक इस ट्वीट के पहुंचने के बाद सीएमओ से इसपर पड़ताल करने को कहा गया। प्रशासन ने जानकारी जुटाई। यहां निगम के अपर आयुक्त श्रृंगार श्रीवास्तव पहुंचे। पता चला कि, फोटो में जो लड़की है उसके पिता नीरज विश्वकर्मा है। 9 वर्षीय हिमाक्षी आईपीएस मेन कैंपस राऊ में चौथी कक्षा में पढ़ती है। हिमाक्षी अपने पड़ोसी आयुष के साथ खेलते हुए उनकी फल बेचने के टोकरी के सामने जाकर बैठ गई। इसी समय किसी ने बच्चों की तस्वीर ली, जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई। नीरज फोटोग्राफी ट्रेनर होने के साथ इनकम टैक्स पेयर भी हैं। वहीं पास में बैठा आयुष, स्नेहलता गंज निवासी राधेश्याम पाटिल का बेटा है। राधेश्याम पैशे से किसान है, वो पिछले 2 सालों से सियागंज के सर्विस सेंटर पर मैकेनिक है। लेकिन, लॉकडाउन क कारण उनका वो कार्य बंद है। उनकी पत्नी भारती भी घरों में जाकर घरेलू कार्य करती हैं। राधेश्याम तीन-चार दिन से फल बेच रहे हैं। वो जब शौच के लिए गए तो बेटा और पड़ोस की बच्ची टोकरी के पास बैठ गई। यही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।


पुलिस और प्रशासन ने की राधेश्याम की मदद

वहीं, फोटो की तस्दीक करने के लिये इंदौर आईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने आरआई जयसिंह तोमर को भी इस काम में लगाया। आरआई सिपाहियों के मार्फत फल व्यापारी राधेश्याम के पास पहुंचे। उससे सड़क किनारे फुटपाथ की जमीन पर रखकर फल बेचने का कारण जाना, तो राधेश्याम ने कहा कि, उसके पास कोई ठेला नही है, इसलिए वो फुटपाथ पर ही फल जमाकर बैठता है। इसपर आरआई ने अपने खर्च से उसे हाथ ठेला तो दिलाया ही, साथ ही 1200 रुपए में उसके सभी फल खरीदकर सिपाहियों में भी बांट दिए। वही, बच्चे ने बताया कि, उसके घर में TV तो है, लेकिन पिछले कई दिनों से वो खराब पड़ी है। लॉकडाउन में स्कूल की पढ़ाई का भी उतना लोड नही है, ऐसे में खेलने के लिये बाहर आ जाते हैं। घर में टीवी कनेक्शन भी कटा है इसलिए टाइम पास नहीं होता है। इसपर पुलिस की ओर से राधेश्याम के घर टीवी सुधरवाई, टीवी कनेक्शन लगवाया ताकि, बच्चे लॉकडाउन में अपने घर में ही रहें। साथ ही, आरआई जय तोमर ने राधेश्याम को फल लाकर बेचने के लिये मदद स्वरूप 10 हजार रुपये भी दिये।

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