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18 साल पहले दर्ज हुआ भ्रष्टाचार का केस, रिटायरमेंट के बाद मिली अभियोजन की अनुमति

सरकारी विभागों में अटके हैं दर्जनों मामले  

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18 साल पहले दर्ज हुआ भ्रष्टाचार का केस, रिटायरमेंट के बाद मिली अभियोजन की अनुमति

18 साल पहले दर्ज हुआ भ्रष्टाचार का केस, रिटायरमेंट के बाद मिली अभियोजन की अनुमति

इंदौर। 18 साल पहले लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम जनकार्य विभाग के एक इंजीनियर पर भष्टाचार के मामले में मुकदमा दर्ज किया था। इंजीनियर ने कलाकारी करते हुए स्वीकृत नक्शे में छेड$खानी करके बिल्डर को फायदा पहुंचा दिया। मुकदमा दर्ज होने के बाद फाइल ठंडे बस्ते में चली गई, जो हाल ही में निकली। आयुक्त ने हाल ही में अभियोजन चलाए जाने की स्वीकृति दे दी। जिसकी सूचना कलेक्टर से लेकर शासन को दी गई।
नगर निगम के जनकार्य विभाग ने शंकर पुरी, गोपाल पुरी के भूखंड 19/1 यशवंत निवास रोड इंदौर के प्लॉट पर बहुमंजिला भवन (12 मीटर से ज्यादा ऊंचाई) बनाने के लिए नक्शा स्वीकृत किया। उसकी भवन अनुज्ञा 26 फरवरी 1990 से जारी गई। नक्शा पास करते समय सहायक यंत्री वीके जैन व उपयंत्री केके मित्तल ने स्वीकृति के समय नक्शे में दर्शाई गई अतिरिक्त मंजिल व ऊंचाई कांटकर 12 मीटर की सीमा तय कर दी थी।
बाद में सहायक यंत्री नित्यानंद जोशी व उपयंत्री चंद्रशेखर शर्मा ने नक्शे पर पूर्व से काटी गई अतिरिक्त मंजिल व ऊंचाई को अलाउड शब्द लिखकर दूसरी सील लगा दी, जिस पर करेक्टेड लिख कर हस्ताक्षर कर दिए। नक्शे को संशोधित करने का अधिकार जोशी व शर्मा को नहीं था, लेकिन उन्होंने भवन अनुज्ञा जारी कर दी। इस पर बिल्डर ने बिङ्क्षल्डग तान दी, जिसकी शिकायत की गई।
पांच साल बाद यानी 1995 में लोकायुक्त पुलिस ने जोशी और शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 की धारा 13(1) डी, 13 (2), (संशोधन अधिनियम 2018) एवं भादंवि की धारा 468, 471, 120 - बी में मुकदमा दर्ज कर दिया गया। उसके बाद से फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी थी और इस बीच शर्मा भी रिटायर हो गए। लोकायुक्त के लगातार दबाव बनने के बाद फाइल नगर निगम हर्षिता सिंह के पास पहुंची जिस पर उन्होंने अभियोजन स्वीकृति का आदेश जारी कर दिया।

असलम के केस को भी हरी झंडी
साल 2018 में लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के बेलदार पद पर काम करने वाले असलम पिता अफजल खान के यहां छापामार कार्रवाई की थी। 13.91 लाख नकद, 58.55 लाख के गहने, 2.77 करोड़ की जमीन व प्लॉट सहित कुल 4.68 करोड़ रुपए की संपत्ति मिली थी। उस पर लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के जरिए अवैध अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज किया। उसके बाद हाल नगर निगम ने असलम र्बिर्खास्त कर दिया था। निगमायुक्त हर्षिता सिंह ने असलम के खिलाफ भी अभियोजन स्वीकृति प्रदान कर दी।