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दत्त मंदिर का इतिहास इंदौर से भी पुराना है, जानिए देशभर से क्यों आते हैं श्रद्धालु

आज भगवान दत्तात्रेय की जयंती है। आईए जानते हैं, इंदौर के प्राचीनकालीन दत्त मंदिर के बारे में...

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Kamal Singh

Dec 13, 2016

datta jayanti special story of datta mandir krishn

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इंदौर.
भगवान दत्तात्रेय की जयंती मार्गशीर्ष माह में आज 13 दिसंबर को मनाई जा रही है। इंदौर में भी दत्त मंदिरों में आज जमकर भीड़ लगी है।

श्री दत्तात्रेय भगवान के जागृत मंदिर का जिक्र मराठाशाही बखर में मिलता है। यहां समर्थ रामदास स्वामी ने साधना की और नजदीक ही खेड़ापति हनुमान की स्थापना भी की।



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इंदौर के कृष्णपुरा के दत्त मंदिर का अस्तित्व इंदौर से भी प्राचीन है, यानी होलकर रियासत के सबूदार मल्हारराव होलकर के मालवा (इंदूर)आगमन से पूर्व श्री दत्त मंदिर की मौजूदगी दर्ज है। यही वजह हैं, कि यह मंदिर देशभर के लोगों के लिए आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालू दर्शन के लिए आते है। मंदिर पुजारी नरहरि दत्तात्रे शुक्ला ने बताया कि श्री दत्तात्रेय भगवान से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते है।


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चिकित्सा शास्त्र में क्रांतिकारी अन्वेषण

दत्तात्रेय में ईश्वर और गुरु दोनों रूप समाहित हैं, इसलिए उन्हें परब्रम्हामूर्ति सद्गुरु और श्रीगुरुदेवदत्त भी कहा जाता हैं। उन्हें गुरुवंश का प्रथम गुरु, साधक, योगी और वैज्ञानिक माना जाता है।

हिंदू मान्यताओं के अनुसार दत्तात्रेय ने पारद से व्योमयान उड्डयन की शक्ति का पता लगाया था और चिकित्सा शास्त्र में क्रांतिकारी अन्वेषण किया था।


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हिंदू धर्म के त्रिदेव ब्रम्हा, विष्णु और महेश की प्रचलित विचारधारा के विलय के लिए ही भगवान दत्तात्रेय ने जन्म लिया था, इसलिए उन्हें त्रिदेव का स्वरूप भी कहा जाता है।

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