
सात साल पहले ब्रेड के पैकेट में मरी हुई छिपकली निकलने के मामले में जिला उपभोक्ता प्रतितोषण आयोग ने फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि ब्रेड पैकिंग करते समय चिपकली भी पैक की गई होगी। इस संबंध में ब्रेड निर्माता कंपनी ने कोई सुबूत पेश नहीं किए। मॉर्डन ब्रेड के निर्माता द्वारा परिवाद दायर करने वाली मीनाक्षी अग्रवाल को एक लाख रुपए दिए जाएं। यह राशि तीन माह में 2015 से अब तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देय होगी। इसके साथ ही 10 हजार रुपए परिवाद व्यय भी देना होगा। आयोग के अध्यक्ष बलराज कुमार पालोदा व सदस्य निधि बारंगे ने यह निर्णय सुनाया है।
परिवादी के वकील सुरेश कांगा ने बताया, 28 नवंबर 2015 को परिवादी ने राऊ इंडस्ट्रीयल एरिया की दुकान से ब्रेड खरीदी। जब पैकेट खोला तो उसमें मरी हुई छिपकली पाई गई। तुरंत शिकायत करने पर भी विपक्षी ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद एसडीएम महू को भी शिकायत हुई, जिसके बाद परिवादी ने आयोग में याचिका लगाई। आयोग ने माना कि मॉडर्न ब्रेड की तरफ से कोई प्रति उत्तर पेश नहीं किया गया। ब्रेड के पैकेट में मरी हुई छिपकली विक्रय करना मानव जीवन केे लिए हानिकारक व घातक हो सकती थी। इस प्रकार यह व्यापार सेवा में भी कमी है।
Updated on:
17 Jan 2024 08:05 am
Published on:
17 Jan 2024 08:04 am
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