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दिल्ली-मुबंई एक्सप्रेस-वे के आसपास 70 हजार को मिलेगा रोजगार, यह राज्य बन रहा है इन्वेस्टमेंट रीजन

मप्र औद्योगिक विकास निगम ने तैयार की योजना, -अगले तीन साल में 70 हजार प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना

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इंदौर

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Manish Geete

Aug 24, 2021

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दिल्ली-मुबंई सामान पहुंचाने में लगेंगे मात्र 8-10 घंटे। रोजगार से लेकर नए औद्योगिकक् क्षेत्र भी तैयार होंगे।

इंदौर. कोरोना संक्रमण काल, लॉकडाउन की मुश्किलों से उद्योग अब उबरने लगे हैं। मप्र औद्योगिक विकास निगम (एमपीआइडीसी) के पास इस समय लगातार उद्योगपति निवेश की जमीन मांगने के लिए पहुंच रहे हैं। इंदौर-उज्जैन रीजन इन दिनों निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है। आत्मनिर्भर देश और प्रदेश की दिशा में बन रहे माहौल को देखते हुए प्रदेश सरकार ने भी कमर कसते हुए दिल्ली-मुबंई एक्सप्रेस वे के आसपास इंदौर व उज्जैन संभाग में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने का रोडमेप तैयार किया है। निगम इस रीजन में दो बड़े और दो छोटे औद्योगिक क्षेत्र तैयार कर रहा है।

जानकारी के अनुसार बड़ा निवेश क्षेत्र रतलाम के समीप तैयार हो रहा है। यहां 2 हजार एकड़ में लॉजिस्टिक पार्क और 3 हजार एकड़ में मल्टी प्रॉडक्ट औद्योगिक क्षेत्र व 1 हजार एकड़ में मंदसौर, नीमच में मल्टी प्रॉडक्ट व टेक्सटाइल पार्क बना रहे हैं। इस तरह 6 हजार एकड़ के नए औद्योगिक क्षेत्र की योजना बन चुकी है।

एमपीआइडीसी के कार्यकारी संचालक रोहन सक्सेना ने बताया, तीनों जिलों में विभाग के आला अफसरों ने जमीन तय कर दी है। नीमच में तो भीलवाड़ा की चार टेक्सटाइल कंपनियां शिफ्ट हो रही हैं। इनके लिए स्थानीय प्रशासन ने जमीनें चिह्नित कर उद्योग विभाग को हस्तांतरित कर दी है। वर्तमान में औद्योगिक निवेश का बहुत अच्छा वातावरण बना है। मांग के अनुरूप तैयार जमीनों के लिए निवेशकों को इंतजार करना पड़ रहा है। मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों में से अधिकांश में बुकिंग पूरी हो चुकी है। इसके अलावा बेटमा के समीप पीथमपुर-7 में करीब 3500 एकड़ में औद्योगिक टाउनशिप व उज्जैन में भी लघु-सूक्ष्म उद्योग का खाका तैयार हो कर काम भी शुरू हो चुका है। इस तरह एक्सप्रेस-वे के आसपास 10 हजार एकड़ से ज्यादा के औद्योगिक क्षेत्र तैयार हो रहे हैं। इनमें अगले तीन सालों में 70 हजार से ज्यादा प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

इसलिए एक्सप्रेस हाई-वे के आसपास

केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली-मुबंई एक्सप्रेस हाई-वे की योजना तैयार की गई है। इसका निर्माण शुरू हो गया है। इससे दिल्ली मुबंई के बीच की दूरी को कम कर 12 घंटे में पहुंचने का लक्ष्य रखा है। यह एक्सप्रेस-वे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मप्र, गुजरात व महाराष्ट्र राज्यों से गुजरेगा। मप्र में यह पश्चिम में रतलाम, मंदसौर, नीमच, झाबुआ व आलीराजपुर जिलों से गुजरेगा। सरकार ने इसके लिए मुख्य क्रॉसिंग मंदसौर जिले के गरोठ के समीप दिया है। यहां से दोनों ओर जाने में 6-6 घंटे का समय लगेगा। सरकार ने इसका फायदा लेने और स्थानीय संसाधनों आधारित उद्योगों को स्थापित करने के लिए यह योजना तैयार की है। इसका लाभ इंदौर व धार के समीप विकसित हो रही बेटमा औद्योगिक टाउनशिप को भी मिलेगा। यह रीजन सेंटर में होने से यहां लॉजिस्टिक हब में अच्छी संभावना भी है।

रतलाम में बनेगा लॉजिस्टिक हब

इसके लिए रतलाम के समीप औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। इसके लिए करीब 4 हजार एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। एक हजार एकड़ के लिए कार्रवाई चल रही है। इस तरह पांच हजार एकड़ में यह औद्योगिक क्षेत्र आकार लेगा। यहां पर लॉजिस्टिक पार्क, फार्मा व ऑटो एनसीलरी पर जोर दिया जाएगा।

मंदसौर में बनेगा फूड पार्क

मंदसौर में करीब 400 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। यहां पर स्थानीय कृषि उत्पादों आधारित उद्योग लगवाने की तैयारी है। इसके लिए फूड प्रोसेसिंग प्लांट, फार्मा व अन्य निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा।

नीमच में टेक्सटाइल इंडस्ट्री

नीमच में भी करीब 350 एकड़ जमीन तय की गई है। इसमें आधी जमीन मिल चुकी है। यहां पर भीलवाड़ा से कुछ टेक्सटाइल इंडस्ट्री शिफ्ट हो रही हैं। इसके अलावा कुछ अन्य ने जमीन मांगी है। यहां पर फार्मा कंपनियों की भी रुचि है।

बेटमा औद्योगिक टाउनशिप

लैंड पूलिंग आधारित यह प्रदेश की पहली औद्योगिक टाउनशिप है। वर्तमान में करीब 3500 एकड़ जमीन मिल चुकी है। इस पर पीथमपुर-7 के नाम से योजना आकार ले रही है। यहां पर बड़े, मध्यम उद्योग के साथ ही कुछ क्लस्टर भी बनाएंगे। यहां पर आवासीय विकास के लिए भी जमीन दी गई है।