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लाखों प्रयासों के बाद भी बेहाल है सरकारी स्कूल

श्रेष्ठ परिणाम देने वाले कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर

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इंदौर/पिथमपुर। एक ओर जहां प्रदेश की सरकार शिक्षा के स्तर को बेहतर करने के लाखों प्रयास कर रही है। सरकारी स्कूलों में बेहतरी के लिए भी सरकारी प्रयास कम नहीं है। लेकिन फिर भी श्रेष्ठ परिणाम देने वाले कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। कुछ ऐसा ही हाल है इंदौर के पिथमपुर के देपालपुर स्थित एक सरकारी विद्यालय का जहां अब तक विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम 90 फीसदी तक रहा है, लेकिन अब यही स्कूल शिक्षकों का इंतजार कर रहा है। बात इसी विद्यालय की नहीं है, जिले भर में कई सरकारी प्राइमरी और माध्यमिक विद्यालय में बच्चों का जीवन अंधकारमय होता नजर आ रहा है। ऐसे मेें चाहे कितने भी प्रयास किए जाएं बेहतरी के परिणाम शून्य ही नजर आएंगे।

यहां नहीं हैं गणित और अंग्रेजी के शिक्षक
देपालपुर के इस स्कूल में अंग्रेजी व गणित के शिक्षक है ही नहीं हैं। जानकारी के मुताबिक ये शिक्षक सीएम राइज स्कूल में पहुंच गए हैं। मध्यप्रदेश शासन के आदेशानुसार शिक्षा विभाग द्वारा कक्षा 5वीं तथा 8वीं को फिर से बोर्ड में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में उन विद्यालयों का क्या होगा, जहां मुख्य विषय पढ़ाने के लिए शिक्षक तक नहीं है। जबकि शासकीय हाई और हायर सेकंडरी स्कूल आगरा का परिणाम हर वर्ष 90 फीसदी से ज्यादा रहता है। इसका मुख्य कारण था कि यहां के विद्यालयों में गणित और अंगे्रजी पढ़ाने वाले शिक्षक थे। इससे उनकी शिक्षा बेहतर हो पाती थी और बच्चे अच्छे परिणाम लाते थे। लेकिन इस वर्ष दोनों ही विषयों के शिक्षक चले गए हैं। उनके जाने के बाद अब तक नई नियुक्ति न किए जाने पर बच्चे शिक्षकों का इंतजार ही कर रहे हैं।

सैकड़ों विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर
शासकीय प्राथमिक विद्यालय आगरा में जहां 135 वहीं माध्यमिक विद्यालय में 170 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है, लेकन माध्यमिक विद्यालय में केवल 3 शिक्षक हैं, एक हैडमास्टर तक नहीं है। यहां कोई भृत्य तक नहीं है। स्थिति यह है कि यहां पढऩे आने वाले बच्चे पढऩे से पहले बच्चे पहले खुद स्कूल की साफ-सफाई करते हैं, उसके बाद जितने शिक्षक उपस्थित हैं, उन्हीं विषयों की पढ़ाई करते हैं।

इन विद्यार्थियों ने कहा कैसे पढ़ें गणित
गणित और अंग्रेजी के शिक्षकों के अभाव के कारण स्कूल में 8वीं कक्षा के विद्यार्थी धाकड़, विशाल, अनुष्का, नैतिक तथा शिवानी बताते हैं कि इस वर्ष से उनकी बोर्ड परीक्षा होगी। लेकिन स्कूल में मुख्य विषयों के ही शिक्षक नहीं है, अब हमें हमारे परिणाम की चिंता सता रही है। यदि सीएम राइज स्कूलों में शिक्षकों की जरूरत है, तो हमें भी यहां गणित हिंदी विषयों के शिक्षकों की आवश्यकता है। ऐसे में हमारा भविष्य दांव पर लगा है।