
चुनाव लड़ने से पहले सामान्य वर्ग के प्रत्याशी को दस हजार तो अजा-अजजा वर्ग के प्रत्याशी को पांच हजार रुपए जमानत राशि जमा करानी होती है। महू विधानसभा में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भाजपा से लाकर रामकिशोर शुक्ला को टिकट दिया, जबकि दिग्विजय सिंह चाहते थे कि अंतरसिंह दरबार को फिर मौका दिया जाए। टिकट नहीं मिलने से दरबार बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े। उनकी जमानत बच गई और शुक्ला तीसरे नंबर पर आए और उनकी जमानत जब्त हो गई।
मालूम हो, निर्वाचन नियमों के हिसाब से कुल मतदान में नोटा हटाने के बाद प्रत्याशी को कम से कम 1/6 वोट लाना अनिवार्य है। महू में कुल 2 लाख 18 हजार 877 वोट डले, जिसमें से नोटा के 1553 घटाने के बाद प्रत्याशियों को कम से कम 36 हजार 220 वोट लाना जरूरी थे, लेकिन शुक्ला को 29144 वोट ही मिले। इससे उनकी जमानत जब्त हो गई। दरबार को 68 हजार 597 वोट मिले।
चौधरी ने बचाई जमानत
देपालपुर में भाजपा से बागी होकर राजेंद्र चौधरी निर्दलीय चुनाव लड़े। वहां 2 लाख 19 हजार 971 वोट गिरे, जिसमें 1151 नोटा को मिले। जमानत बचाने के लिए 36 हजार 470 वोट आवश्यक थे। चौधरी को 37 हजार 920 वोट मिले। इससे उनकी जमानत बच गई। जिले के 92 प्रत्याशियों में से 19 की जमानत बच गई तो 73 की जमानत जब्त हुई, जो निर्वाचन आयोग के खाते में जमा है। इनमें करीब 20 अजा व अजजा वर्ग के प्रत्याशी हैं।
Published on:
07 Dec 2023 09:44 am
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