
Indore News : गड़बड़ी...अब ड्रेनेज चेंबर ढक्कन की जीओ टैगिंग
उत्तम राठौर
इंदौर. शहर में ड्रेनेज के दो लाख से ज्यादा चेंबर हैं। इनके ढक्कनबदलने के नाम पर सबसे ज्यादा गड़बड़ी होती आई है। एक ही चेंबर के ढक्कन को कई बार बदल दिया जाता है और कई बार बिना बदले फाइल बन जाती है। फाइल के साथ बिल भी पास हो जाता है। ड्रेनेज चेंबर ढक्कन की गड़बड़ी को रोकने के लिए नगर निगम ने अब नई व्यवस्था कर दी है। अब ढक्कन की जीओ टैगिंग की जा रही है। जिन चेंबर ढक्कन की फाइल जीओ टैगिंग के बिना आ रही है, उन्हें पास नहीं किया जा रहा है।
निगम के शहर में 19 जोन हैं। इनके अंतर्गत 85 वार्ड आते हैं। इनके कॉलोनी-मोहल्लों में ड्रेनेज के चेंबर टूटने पर सुधारने और ढक्कन बदलने का काम जोन स्तर से होता है। इसके लिए फाइल तैयार जोन पर जोनल अफसर और जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग के उपयंत्री व सहायक यंत्री मिलकर करते हैं। फाइल को मंजूरी निगम मुख्यालय पर कार्यपालन यंत्री, अधीक्षण यंत्री और अपर आयुक्त देते हैं। इसके बाद ढक्कन बदलने का काम होता है।
एक लाख रुपए के अंदर की फाइल कोटेशन पर जोन और निगम मुख्यालय में अफसरों के स्तर पर ही हो जाती है, लेकिन एक लाख से ऊपर की फाइल को लेकर टेंडर बुलाना पड़ता है, इसलिए ड्रेनेज चेंबर का ढक्कन बदलने का काम अधिकतर कोटेशन पर ही होता है, ताकि गड़बड़ी की जा सके। एक ही चेंबर के ढक्कन को कई बार कागजों पर बदल दिया जाता और कई बार बिना बदले ही फाइल बन जाती। फाइल के साथ बिल भी पास हो जाता है। इतना ही नहीं, चेंबर ढक्कन की गुणवत्ता पर सवाल अलग उठते रहे है, क्योंकि ढक्कन बदलने के चंद दिनों में ही भारी वाहन गुजरने से टूट जाता है।
गड़बड़ी करने में निगम अफसर, ठेकेदार और स्थानीय पार्षद सब शामिल रहते हैं। पिछले कई वर्षों से चली आ रही ढक्कन बदलने के नाम पर गड़बड़ी रोकने के लिए निगम ने अब नया रास्ता निकाला है, जो कि ड्रेनेज चेंबर ढक्कन पर जीओ टैगिंग लगाना है। इसकी अनिवार्यता करने के बाद उन ठेकेदारों का मरण हो गया है, जो कि अफसर और पार्षदों की मिलीभगत से अपने मतलब का उल्लू सीधा करते थे। अब जिन चेंबर ढक्कन की फाइल जीओ टैगिंग के बिना आ रही है, उन्हें पास नहीं किया जा रहा है, इसलिए कई ठेकेदार अपनी फाइल पास कराने के लिए ढक्कन पर जीओ टैगिंग लगा रहे हैं। इसके फायदे और नुकसान दोनों ही हैं
ऐसे होगा फायदा
ड्रेनेज चेंबर ढक्कन पर जीओ टैगिंग से निगम को फायदा होगा। जैसे ही जिस साइट पर ढक्कन बदलने के बाद फिर से लगाने को लेकर फाइल लगेगी, वैसे ही टैगिंग के जरिए गूगल पर सर्च करते ही लोकेशन और ढक्कन बदलने का दिन-तारीख और समय दिखने लगेगा और फाइल मंजूर नहीं होगी। गड़बड़ी रुकेगी। ढक्कनों की गुणवत्ता में सुधार होगा और करोड़ों रुपए बचेंगे।
ऐसे होगा नुकसान
शहर में ड्रेनेज ढक्कन बदलने और जीओ टैगिंग लगाने के बाद अगर उस पर से भारी वाहन गुजर गया, तो वह टूट जाएगा। इस कारण ढक्कन को तत्काल नहीं बदला जा सकेगा, क्योंकि टैगिंग की वजह से वह ढक्कन बदलने की नई फाइल को कम्प्यूटर एक्सेप्ट नहीं करेगा। ऐसे में जीओ टैगिंग से पुराने ढक्कन की डिटेल हटाने के बाद ही फाइल लगेगी। इसमें समय लगेगा और चेंबर का ढक्कन टूटा पड़ा रहेगा।
अटक गई कई फाइल
ड्रेनेज चेंबर ढक्कन पर जीओ टैगिंग लगाने के बाद ही निगम में फाइल मंजूर की जा रही है। इस कारण जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग में कई फाइलें अटक गई हैं, क्योंकि चेंबर ढक्कन पर टैगिंग नहीं है। इसके बिना ही फाइलें मंजूर कराने में ठेकेदार लगे हुए हैं, मगर हो नहीं रही। ठेकेदार पार्षद से लेकर अफसरों के चक्कर अलग काट रहे हैं।
पाइप लाइन सफाई में मिलेगी मदद
शहर में ड्रेनेज के 2 लाख चेंबर की जीओ टैगिंग होने से निगम के पास जहां डेटा एकत्रित हो जाएगा, वहीं पाइप लाइन सफाई में मदद मिलेगी। लाइन चोक होने पर जीओ टैगिंग के जरिए आसानी से ढूंढा जा सकेगा और काम करने में आसानी होगी। जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग जीओ टैगिंग के जरिए पाइप लाइन का ब्लू प्रिंट भी तैयार करेगा, ताकि मालूम रहे कि कौन सी लाइन कहां जा रही और कहां जुड़ी है। अभी लाइनों को लेकर निगम के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है।
शहर में जगह-जगह टूटे पड़े हैं चेंबर और ढक्कन
एक तरफ जहां ड्रेनेज चेंबर ढक्कन पर जीओ टैगिंग लगाकर गड़बड़ी रोकी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग की अनदेखी की वजह से शहर के मुख्य मार्ग, कॉलोनी-मोहल्लों की सडक़ों पर कई जगह ड्रेनेज चेंबर क्षतिग्रस्त पड़े हुए हैं। ये क्षतिग्रस्त चेंबर लोगों के लिए मुसीबत बन गए हैं। ढक्कन न होने से दुर्घटना अलग होती रहती है। शहर में ड्रेनेज चेंबर के क्षतिग्रस्त होने और ढक्कन न होने की शिकायत निगम मुख्यालय, सीएम हेल्पलाइन, जोनल ऑफिस और मोबाइल एप-311 पर की जाती है। इन शिकायतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है, मगर कम नहीं हो रहा हैं। कारण जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग के अफसर ड्रेनेज चेंबर बनाने, ढक्कन लगाने और रिपेयर करने की सुध नहीं लेते हैं। ड्रेनेज पाइप लाइन और चेंबर चोक होने की समस्या बता-बताकर लोग थक जाते, लेकिन समय रहते समाधान नहीं होता है।
डेटा हो जाएगा इकट्ठा
ड्रेनेज चेंबर ढक्कन पर जीओ टैगिंग की जा रही है। इससे ढक्कन बदलने के नाम पर निगम में वर्षों से होने वाली गड़बड़ी पर विराम लगेगा और निगम के पास पूरा डेटा एकत्रित हो जाएगा, इसलिए बिना जीओ टैगिंग के चेंबर ढक्कन बदलने की फाइल को मंजूर नहीं किया जा रहा है। जीओ टैगिंग से चेंबर और पाइप लाइन का डेटा निगम के पास रहेगा। साथ ही सफाई कार्य में मदद मिलेगी।
- अभिषेक शर्मा, प्रभारी, जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग
Published on:
18 Mar 2023 11:00 am
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