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ऐसे बना था ‘तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही’-इस्माइल दरबार

बेहद कम बन पाती है अच्छी चीजें, पत्रिका से बातचीत में संगीतकार इस्माइल दरबार ने कहा  

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esmile darbar

इंदौर. हम लोग लंबे समय तक गाने की रिकार्डिंग करते रहे, लेकिन सुबह चार बजे ‘तड़प-तड़प के इस दिल से आह निकलती रही’ गाने की रिकार्डिंग हो पाई। कई घंटों के बाद बने इस गाने ने उस समय कई रिकार्ड कायम किए थे। ऐसा कई बार होता है कि मुझे अपना तैयार किया हुआ संगीत ही पसंद नहीं आता है और इसके बाद मैं सिर पर रुमाल बांधकर झंडू बाम लगाकार आराम करने लग जाता हूं। थोड़ी देर रिलैक्स होने के बाद नए सिरे से संगीत तैयार करता हूं। अच्छी चीजें बेहद कम बनती है और यह बात संगीत पर भी लागू होती है। यह कहना है मशहूर संगीतकार इस्माइल दरबार का। वह शनिवार को आसिफ और सावी के फैशन शो रियासत में शिरकत करने के लिए इंदौर में थे। इस दौरान पत्रिका से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी फिल्म के लिए संगीत बनाने से पहले मैं उसकी कहानी को पूरा पढ़ता हूं। किरदारों को समझने के बाद उन्हें महसूस करता हूं और उसके बाद ही संगीत बनाना शुरू करता हूं। यही कारण है कि मुझे संगीत बनाने में वक्त लगता है। दरबार ने हम दिल दे चुके सनम, देवदास जैसी सुपर हिट फिल्मों के बाद अब संजय दत्त की फिल्म से वापसी कर रहे हैं।

वक्त बदलता है...

उन्होंने कहा कि वक्त का तकाजा है कि आज लोगों को वो संगीत पसंद नहीं आता जैसा मैं बनाता हूं, पर वक्त बदलता है। मुझसे पहले जो अच्छा संगीत देते थे उनका दौर भी खत्म हुआ, यह दौर भी खत्म होगा और कुछ नया आएगा। जब मैं संगीत बना नहीं रहा होता हूं तो संगीत सुनना मेरा पंसदीदा काम है। इनमें लता और मदन मोहन के गीत मेरे करीब है। संजय लीला भंसाली की फिल्मों को सिर्फ अपने संगीत से हिट करा चुके इस्माइल दरबार का कहना है कि यह भगवान की कृपा है कि जब हम दोनों मिलते हैं तो जादू हो जाता है और कुछ ऐसा क्रिएट हो जाता है जो लोगों को बेहद पसंद आता है।