इंदौर. उनकी वीरता और अदम्य साहस की बदौलत तात्या टोपे ने प्रभावित होकर टंट्या को गुरिल्ला युद्ध में पारंगत बनाया था। अंग्रेजों के शोषण तथा विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ उठ खड़े हुए और देखते ही देखते वे गरीब आदिवासियों के मसीहा बनकर उभरे। वे अंग्रेजों को लूटकर गरीबों की भूख मिटाते थे।
हम बात कर रहे हैं इंडियन रॉबिनहुड के नाम से पहचाने जाने वाले टंट्या भील की। आज देश की आजादी के जननायक और आदिवासियों के हीरो टंट्या भील की पुण्यतिथि है।
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उन्होंने गरीबी-अमीरी का भेद हटाने के लिए हर स्तर के प्रयास किए थे। जिससे वे छोटे-बड़े सभी के मामा के रूप में भी जाने जाने लगे। मामा संबोधन इतना लोकप्रिय हो गया कि प्रत्येक भील आज भी अपने आपको मामा कहलाने में गौरव का अनुभव करता है।
विद्रोही तेवर से मिली थी पहचान
यह भी पढ़ें- तलाक- तलाक-तलाक, शबाना ने खून से चीफ जस्टिस को लिखी दरख्वास्त!विद्रोही तेवर से कम समय में ही बड़ी पहचान हासिल की थी। आजादी के पहले हमारे देश में अंग्रेजों का साम्राज्य था और गरीब आदिवासियो के बारे में भारत में अंग्रेज शासन दौर में बहुत कम लिखा जाता था और उनके पक्ष में बहुत कम काम होता था। इस महत्वपूर्ण कमी के कारण भारत के राष्ट्रीय आंदोलनों के इतिहास में एक शून्यता जैसी दिखती है।
संस्कृति को बाहरी प्रभाव से बचाने की थी चिंतायह भी पढ़ें- CA की सलाह, जेब में नहीं कैश तो डिजिटल खर्च करें अपनी मनीइस शून्यता को भरने के लिए हमें भारतभर में व्यापक रूप से फैले उन जनजातीय समुदायों के इतिहास को नजदीक से देखना होगा। जिन्होंने अधिकारों की रक्षा के लिए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। आदिवासियों के विद्रोहों की शुरुआत प्लासी युद्ध (1757) के ठीक बाद ही शुरू हो गई थी और यह संघर्ष बीसवीं सदी की शुरुआत तक चलता रहा। अपने सीमित साधनों से वे लम्बे समय तक संघर्ष कर पाए, क्योंकि वनांचल में गुरिल्ला युद्ध प्रणाली का उन्होंने उपयोग किया था। सामाजिक रूप से उनमें आपस में एकता थी और अपनी संस्कृति को बाहरी प्रभाव से बचाने की उन्हें चिंता भी थी। इन बातों ने उनमें एकजुटता पैदा की और वे शोषण तथा विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ उठ खड़े हुए।
रानी लक्ष्मीबाई से ली थी प्रेरणाटंट्या भील, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से प्रेरणा लेकर अन्याय का विरोध करते थे। वे गरीबों की भी भरपूर मदद करते थे। इसके लिए वे लूटपाट भी कर लेते थे, लेकिन पूरा धन गरीबों में बांट देते थे। टंट्या मामा के कारनामों के चलते अंग्रेज ही उन्हें रॉबिनहुड नाम देते है।