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G20: मिलेट्स मिशन पर बोले सीएम- मध्यप्रदेश मिलेट्स की राजधानी

G 20Summet 2023 indore: इंदौर में जी20 देशों के कृषि समूह की अहम बैठक...।

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इंदौर

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Manish Geete

Feb 13, 2023

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इंदौर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2023 को अंतरराष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया है। भारत के पारंपरिक मोटे अनाज ज्वार, बाजरा, कोदो, कुटकी में बहुत पोषण है। इनको हम धरती से खत्म न होने दें इसलिए भारत में अभियान चल रहा है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सोमवार को जी20 देशों के कृषि समूह की बैठक का उद्घाटन कर रहे थे। जी-20 समूह के कृषि प्रतिनिधियों की बैठक 13 से 15 फरवरी तक चलेगी। इसमें कई देशों के 100 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। इस बैठक के दूसरे दिन मंगलवार को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल होंगे।

सीएम के भाषण की अहम बातें

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने संबोधन में कहा कि पीएम मोदी ने भारत के मोटे अनाजों को श्री अन्न नाम दिया है। मध्यप्रदेश का आप यदि कोदो-कुटकी खा लें, तो आपको स्वास्थ्य के रूप में बहुत लाभ होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग आवश्यकतानुसार कृषि का विविधीकरण का प्रयत्न हम कर रहे हैं। फूलों-फलों की खेती, सब्जी व औषधियों की खेती के साथ ही पशुपालन, मत्स्य पालन का प्रयास हम कर रहे हैं।

चौहान ने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के लिए हम केमिकल तथा फर्टिलाइजर का उपयोग कर रहे हैं जिससे न केवल धरती का स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है बल्कि मनुष्य का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती का अभियान छेड़ा है।

जैविक खेती में नंबर-1 मध्यप्रदेश

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मध्यप्रदेश जैविक खेती में नम्बर 1 है। यहाँ लगभग साढ़े 17 लाख हेक्टेयर में जैविक खेती हो रही है। हमारे किसान गाय-भैंस के गोबर से बने खाद का उपयोग कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में इस साल 60 हजार किसानों ने प्राकृतिक खेती के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है।

प्रेस कांफ्रेंस में क्या बोले मुख्यमंत्री

बैठक से पहले सीएम शिवराज सिंह चौहान ने प्रेस कांफ्रेंस भी की जिसमें चौहान ने कहा कि हमारे लिए गौरव का दिवस है। मध्यप्रदेश विशेषकर इंदौर के लिए। जी 20 जिसकी अध्यक्षता पीएम मोदीजी के नेतृत्व में भारत कर रहा है। उसके कृषि समूह की अहम बैठक इंदौर में है। इस बैठक में कई देशों से प्रतिनिधि आए हैं। उनका परंपरागत स्वागत किया गया। विशेषत उन्होंने हैरिटेज वाक किया। राजबाड़ा और आसपास।

चौहान ने कहा कि दूसरे देशों में बैठक होती है तो सिर्फ बैठक ही होती है। ऐसा आत्मीयता से स्वागत डेलिगेट्स का हुआ है, इस कारण वे प्रसन्न हैं और गदगद हैं। वे मांडवगढ़ भी जाएंगे। चौहान ने कहा कि यह हमारे लिए भी एक अवसर है, कृषि से जुड़ी कई समस्याएं है उन पर तो चर्चा करेंगे, लेकिन वे सभी भारत की संस्कृति, संस्कार को भी जानें यह अवसर है हमारे पास। इसलिए जी20 की बैठक हुई तो हमने भोपाल में ऐसा ही स्वागत किया। 30 देशों के 89 डेलिगेट्स जहां कहीं भी जाएं तो वे कहें कि मध्यप्रदेश अद्भुत है।

आज दुनियाभर में मध्यप्रदेश के अनाज की डिमांड है। 21 लाख मिट्रिक टन हमने एक्सपोर्ट किया। हमारा शरबती गेहूं (एमपी वीट) नाम से ही पूरी दुनिया में बिकता है। लेकिन, जरूरत को देखते हुए हम एक्सपोर्ट नहीं कर रहे हैं। हमारे बासमती राइस की सुगंध पूरी दुनिया को आकर्षित करती हैं। बालाघाट के चिन्नोर चावल को जीआइ टैग मिल गया। हमने पीएम मोदी कने नेतृत्व में जो टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया है, आज दुनिया उसको भी देख रही है, बल्कि उससे सीखने का भी काम कर रही है। एक तरफ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल, हमने किसानों के हेल्थ कार्ड बना दिए। ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं, डिजिटलाइजेशन कर रहे हैं। तो दुनिया इसको भी ध्यान से देख रही है। सीख भी रही है।

चौहान ने कहा कि मोटे अनाज पर भी काम कर रहे हैं। इनको पीएम मोदी ने नाम दे दिया श्री अन्न। हम धीरे-धीरे भूल गए थे, ज्वार, बाजरा, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी। इसकी प्रदर्शनी भी लगी हुई है। कोदो और दाल दरने वाली चक्की। इससे शुद्ध अन्न मिलता था। इस बार दुनिया का मिलेट्स ईयर है। पोषक तत्व कितने होते हैं इनमें। उनकी कितनी उपयोगिता है, न्यूट्रीशियन वेल्यू कितनी है, जो खत्म नहीं होती।

चौहान ने कहा कि लहरी बाई जैसे लोग मौजूद है, पीएम मोदी ने भी उनके प्रशंसा की है। लहरी बाई ने तो बीज बैंक ही बना दिया। क्योंकि कहीं बीज खत्म नहीं हो जाए। जैविक खेती में मध्यप्रदेश नंबर वन है। यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इसके अलावा हम प्राकृतिक खेती भी कर रहे हैं। यह कैमिकल फर्टिलाइजर, कीटनाशक, अन्न और सब्जियों को विषेला नहीं बना रहा, यह मानव के लिए खतरनाक है। पहले गिद्ध वातावरण नहीं नहीं दिखते है। कीटनाशकों के कारण वो भी खत्म हो गए। हमने कुछ गिद्ध बचाकर रखे हैं। यह कीटनाशकों के कारण हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहला अनाज हमारे पास ही नहीं हुआ करता था। आज दुनिया की जरूरत की पूर्ति भी भारत कर रहा है। इस बढ़ती हुई मांग की आपूर्ति में भारत ने बहुत अहम योगदान दिया है। अकेले मध्यप्रदेश में 21 लाख मीट्रिक टन गेहूं का एक्सपोर्ट किया है। 18 साल में हमने बुवाई का क्षेत्र 299 लाख हेक्टेयर कर दिया। उत्पादन भी बढ़ गया।