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इंदौर। रिवारों के टूटने की पहली वजह परिवार के हर सदस्य की अब एक अलग पहचान बनाना है, जबकि पहले पिता या बड़े सदस्य की पहचान से परिवार चला करते थे। इसी तरह दूसरी वजह परिवार के सदस्यों को पूरी फ्रीडम चाहिए और तीसरा कारण हर व्यक्ति अपनी स्वयं की तरक्की के बारे में सोचता है क्योंकि सामूहिक तरक्की में कई लोगों को लगता है कि वो अपना वजूद खो रहा है। इसके अलावा चौथा कारण यह है कि आजकल हर किसी की अपनी महत्वकांक्षाएं पूर्ण ना होना है और पांचवा कारण विचारों में टकराव का बढ़ना है। ये पांच कारण ग्लोबल हैप्पीनेस लीडर डॉ. गुरमीत सिंह नारंग (global happiness leader Dr. Gurmeet Singh Narang) ने एक कार्यक्रम के तहत बताए।
उन्होंने परिवार के टूटने के कारण बताते हुए कहा आधुनिक तकनीक और संसार की तेज गति ने आपसी सामंजस्य को तहस नहस कर दिया है। बड़े परिवार में रहकर जवाबदारी को बोझ मानना, पैसे और भौतिक संसार की बढ़ती चाहत से संबंधो को अलग करना, सहनशक्ति का कम होना, अपने अधिकारों को लेकर ज़्यादा मुखर होना और अपने स्वार्थ के लिए झूठ बोलना जैसे तमाम कारणों के चलते आजकल परिवार टूट रहे हैं।
संबंधों को दें तवज्जो
जरूरी है कि सभी अपने आर्थिक संसाधनों और भौतिक पदार्थों को तवज्जो देने की बजाय संबंधों को तवज्जो दें और रिश्तों में सामंजस्य हो इसके लिए स्वयं के बजाय सम्पूर्ण परिवार के हित के लिए जीना सीखें। आपसी सामंजस्य का परिवार में बनना उन पर ज्यादा निर्भर करता है। क्योंकि वे बड़े परिवार के लंबे समय तक साथ बने रहने में सबसे बड़ी भूमिका अदा कर सकती है।
बांटने से घटती है दुख और चिंता
डॉ. नारंग ने कहा जीवन की सत्यता और वास्तविकता से रूबरू होकर ये समझना पड़ेगा कि हम एक दूसरे के सुख और दु:ख में एक दूसरे के सहयोग के लिए बने है। जिस अलग वजूद के लिए हम अलग होने की कोशिश में रहते है वास्तव में वो वजूद कोई मायने नहीं रखता। कुछ मायने रखता है तो वो है जीवन को साथ जीना और आनंद करना। बड़े परिवार के बहुत फायदे हैं। सभी को समझना होगा कि दु:ख और चिंता बांटने से घटते हैं और सुख बांटने से बढ़ता है।
संयुक्त परिवार का बहुत महत्व है
डॉ. नारंग ने कहा मैं संयुक्त परिवार यानि करीब 43 लोगों के परिवार में पला बड़ा हूं। खासियत यह थी कि सभी एक-दूसरे के साथ हर परेशानी में खड़े रहते थे और कोई पराया या कोई सगा नहीं था। पिता कपड़े सिलवाने के लिए कपड़े का एक थान ले आते थे और सबको एक जैसे कपड़े बनवाकर देते थे ताकि कोई भेदभाव किसी में न रहे।
Updated on:
25 Jun 2022 02:12 pm
Published on:
25 Jun 2022 02:09 pm
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