
प्रभु की एक छवि आंखों में बसाने के लिए उमड़ा भक्तों का मेला
इंदौर. गुमाश्ता नगर स्थित श्री तिरुपति बालाजी वेंकटेश देवस्थान पर ५६ भोग की खुशबू से पूरा परिसर महक रहा था। इस अवसर पर अनुपम श्रृंगार और गिरिराज धरण की झांकी को देखने भक्तों का मेला लगा हुआ था।
शनिवार को प्रभु को भोग झालरिया पीठाधिपति घनश्यामाचार्य महाराज ने अर्पित किया। मंदिर में हर साल की तरह अन्नकूट महोत्सव तथा छप्पन भोग दर्शन महोत्सव मनाया। मंदिर परिसर में गिरिराजधरण की नयनाभिराम झांकी सजाई गई थी। भगवान ने अपनी एक अंगुली में पर्वत उठाया हुआ था। नीचे नदी का पानी भी हिलोरे ले रहा था। प्रभु को छप्पन भोग प्रसादी अर्पित की गई थी। झालरिया पीठाधिपति स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज ने ठीक पौने सात बजे महाआरती प्रारंभ की। जय जानकीनाथा के उद्घोष से मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया। आरती के ठीक बाद प्रभु के मनोहारी दर्शन सभी के लिए सुलभ हुए, जिसे निहारने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। ज्यों ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की बारी आई तो वे प्रभु के इस मनोहारी दर्शन को अपलक निहारते रहे। भावुक भक्तों के मुख से वेंकट रमणा गोविंदा का उद्घोष निकल पड़ा। देवस्थान ट्रस्ट के ट्रस्टी पुरुषोत्तम पसारी व प्रचार प्रमुख रामस्वरूप मूंदड़ा ने बताया, स्वामी घनश्यामाचार्य महाराज तथा युवराज स्वामी भूदेवाचार्य महाराज भी मंदिर परिसर में उपस्थित होकर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे थे। उन्होंने उद्बोधन में प्रसाद की महत्ता बताते हुए कहा कि प्रसाद मात्र के सेवन से मनुष्य के जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं। प्रसाद वितरण में बालाजी मित्र मंडल की महिला कार्यकत्र्ता तल्लीनता से लगी हुई थी। भगवान का यह अनुपम श्रृंगार हुआ। इस अवसर पर राधाकृष्ण मुछाल, लक्ष्मणदास पटवा, गोपालदास मित्तल, विजय बांगड़, ओमप्रकाश पसारी, गोपाल न्याती, भगवानदास मुछाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य बंधु उपस्थित थे। देर रात तक दर्शन के लिए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही।
Published on:
02 Dec 2018 04:16 am
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