3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कैंसर पीडि़तों में 40% को मुंह व गले में बीमारी, समय पर इलाज ही बचाव

एडवांसस्टेज में अस्पताल पहुंच रहे मरीज, आयुर्वेद कॉलेज में भी हो रहा उपचार

2 min read
Google source verification

इंदौर

image

Ramesh Vaidh

Jul 27, 2023

कैंसर पीडि़तों में 40% को मुंह व गले में बीमारी, समय पर इलाज ही बचाव

इंदौर. शासकीय कैंसर अस्पताल की ओपीडी में इंदौर सहित अन्य जिलों से पहुंचने वाले 100 नए मरीजों में से 35 से 40 फीसदी मुंह व गले के कैंसर से जूझ रहे हैं। इन 40 फीसदी में से भी 75 फीसदी मरीज एडवांस स्टेज वाले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर कैंसर की पहचान व इलाज शुरू हो तो बीमारी को बढऩे से रोका जा सकता है।
हेड एंड नेक कैंसर की श्रेणी में मुंह, दोनों गाल, मसूड़े, गले का मध्य व निचला भाग, स्वर यंत्र और लार ग्रंथि को लिया जाता है। शासकीय कैंसर अस्पताल में हर साल करीब ३ हजार नए मरीजों का पंजीयन हो रहा है। 27 जुलाई को हेड एंड नेक कैंसर डे मनाया जाता है। इसका उद्देश्य नशे सेे नुकसान के प्रति जागरूक करना है। अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज में भी हर साल कैंसर के 500 मरीजों का आयुर्वेदिक दवाइंयों से उपचार करते है। इनमें 30 फीसदी मरीज मुंह व गले के कैंसर से पीडि़त हैं।
25 करोड़ लोग करते हैं तंबाकू का सेवन: डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 25 करोड़ लोग सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, गुटखा, पान मसाला या अन्य रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। तंबाकूजनित रोगों से प्रतिवर्ष दुनिया में लगभग 50 लाख लोगों की मौत होती है। इनमें करीब डेढ़ लाख महिलाएं हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, एक सिगरेट पीने से जिंदगी के 11 मिनट कम हो जाते हैं।
योग से मरीज हो रहे तनाव मुक्त
अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज के डॉ. अखिलेश भार्गव ने बताया कि आयुर्वेद से भी कैंसर का इलाज किया जा रहा है। योग, प्राणायाम द्वारा तनाव मुक्ति एवं शरीर में बल की प्राप्ति होती है। पंचकर्म चिकित्सा से भी लाभ मिलता है। शिरोधारा द्वारा रोगी को नींद आने में सहायता मिलती है। तुलसी के 3 से 5 ग्राम चूर्ण का प्रयोग करने से तनाव के प्रमुख कारण कोर्टिसोल में कमी आती है।

तंबाकू सेवन से मुंह के अंदर की म्यूकोसा गलने लगती है। जो धीरे-धीरे कैंसर का कारण बनती है। हर साल नए मरीज बढ़ रहे हैं। जो मरीज अस्पताल आते हैं, उनमें से कई एडवांस स्टेज के होते हैं। समय पर लक्षणों की जांच जरूरी है। - डॉ. सुधीर कटारिया, शासकीय कैंसर अस्पताल

प्रारंभिक स्तर पर ही लक्षणों की पहचान के लिए लोगों का जागरूक होना आवश्यक है। तंबाकू उत्पादों का सेवन मुंह व गले के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। लोगों को इस लत से छुटकारा दिलाना बेहद जरूरी है। -डॉ. सुनील आर्य, अधीक्षक, शासकीय कैंसर अस्पताल