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जानिए कैसे करें मां सरस्वती का पूजन, मिलेगा विद्या का दान

वसंत पंचमी पर मां सरस्वती का पूजन पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से किया जा रहा है।

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Narendra Hazare

Feb 12, 2016

वसंत पंचमी पर मां सरस्वती का पूजन पूरे देश में बड़े ही धूमधाम से किया जा रहा है। विद्या की जरुरत हर उम्र और वर्ग के लोगों को होती है। बिना इसके हमारा जीवन भी संभव नहीं है। इसलिए मां सरस्वती का विधान से पूजन कर आप भी सदबुद्धि और विद्या का आशीर्वाद ग्रहण कर सकते हैं। इस मौके पर mp.patrika.com आपको बताने जा रहे हैं मां सरस्वती की पूजा करने की सरल विधि-

नियमपूर्वक कलश स्‍थापन

सरस्वती पूजा के दिन लोग अपने-अपने घरों में माता की प्रतिमा की पूजा करते हैं। सरस्वती पूजा करते समय सबसे पहले सरस्वती माता की प्रतिमा अथवा तस्वीर को सामने रखना चाहिए। कलश स्थापित करके गणेश जी और नवग्रह की विधिवत पूजा करनी चाहिए। इसके बाद शुरू की जाती है मां सरस्वती की पूजा।

मां को पसंद है पीले रंग का प्रसाद

सरस्वती माता की पूजा करते समय उन्हें सबसे पहले आचमन और स्नान कराएं। इसके बाद माता को फूल, माला चढ़ाएं, धूप आदि अर्पित करें। सरस्वती माता को सिन्दूर, अन्य श्रृंगार की वस्तुएं भी अर्पित करनी चाहिए। बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता के चरणों पर गुलाल भी अर्पित किया जाता है। देवी सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं अत: उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं। सरस्वती पूजन के अवसर पर माता सरस्वती को पीले रंग का फल चढ़ाएं। प्रसाद के रूप में मौसमी फलों के अलावा बूंदिया अर्पित करना चाहिए। इस दिन सरस्वती माता को मालपुए और खीर का भी भोग लगाया जाता है।

sarswati

सरस्वती पूजा में हवन

सरस्वती पूजा करने बाद सरस्वती माता के नाम से हवन करना चाहिए। हवन के लिए हवन कुण्ड या फिर भूमि पर सवा हाथ चारों तरफ नापकर एक निशान बना लेना चाहिए. अब इस भूमि को कुशा से साफ करके गंगा जल छिड़क कर पवित्र करें और यहां पर हवन करें। हवन करते समय गणेश जी, नवग्रह के नाम से हवन करें। इसके बाद सरस्वती माता के नाम से ओम श्री सरस्वतयै नम: स्वहा इस मंत्र से एक सौ आठ बार हवन करना चाहिए। हवन के बाद सरस्वती माता की आरती करें और हवन का भभूत लगाएं। माघ शुक्ल पंचमी यानी वसंत पंचमी के दिन सरस्वती मां की पूजा के बाद षष्टी तिथि को संध्या काल में प्रणाम करके जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।

छोटे बच्चों से कराएं ये विधि

छोटे बच्चों से वसंत पंचमी पर अक्षराभ्यास कराने से बड़े होकर उनकी बुद्धि तीव्र होती है। अक्षराभ्यास का तात्पर्य है कि बच्चों को पूजन के समय अपनी गोद में बिठाएं और उनसे मां सरस्वती की प्रतिमा के साथ गणेश जी पर फूल और अक्षत चढ़वाना चाहिए। इसके बाद स्वस्तिवाचन या संस्कृत श्लोक का पाठ बच्चों को सुनाना चाहिए।

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