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जिस योजना 53 को लेकर प्राधिकरण (IDA) वर्षों से चिल्ला रहा है कि योजना खत्म नहीं हुई और एक हाउसिंग सोसाइटी की जमीन छोड़ नहीं रहा, उसी योजना को लेकर एक कारनामे का खुलासा हुआ है। हाउसिंग सोसाइटी की जमीन से लगकर जमीन पर बनी 'अवैध मल्टी' के लिए आईडीए (IDA) ने खुद यह कहते हुए एनओसी दे दी थी कि यहां कोई योजना नहीं है, जबकि इस जमीन का कब्जा खुद आईडीए ने 29 साल पहले ही ले लिया था।
खजराना की खसरा नंबर 543 के एक हिस्से पर बन रही मल्टी को प्रशासन ने अवैध घोषित कर कुर्क कर लिया था। बिल्डर ने मल्टी के लिए सरकारी जमीन पर भी कब्जा कर लिया था। जांच के बाद टीएनसीपी (TCP) ने भी नक्शा निरस्त कर दिया था। कांग्रेस सरकार आने के बाद बिल्डर ने राजस्व मंडल से आदेश करवा लिया, जिसमें खसरा नंबरों को सुधारना है।
इस मामले में कमिश्नर और कलेक्टर दोनों ने ही चुप्पी साध रखी है, जबकि कलेक्टर ने ही मल्टी को अवैध करार देते हुए कुर्क करवाया था। इधर कमिश्नर, जो कि आईडीए चेयरमैन भी हैं, को भी इस तथ्य से अवगत करवाया जा चुका है कि जमीन योजना 53 (Scheme 53) का ही हिस्सा है और इसका कब्जा आईडीए ने 1990 में ही ले लिया था। इसके बाद भी आईडीए ने एनओसी (IDA NOC) दे दी। इधर राजस्व मंडल के आदेश के खिलाफ अब तक प्रशासन ने अपील नहीं की, यह भी हैरत में डालने वाला विषय है।
क्या है जमीन का किस्सा
Published on:
18 Sept 2019 11:16 am
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