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आईडीए की योजनाओं से खान में मिल रही गंदगी

बनाना था सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, एक में भी नहीं बनाया

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Sanjay Bhandari

Jan 28, 2016

इंदौर.
एक ओर खान नदी शुद्धिकरण के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) लगातार नगर निगम को सख्त निर्देश दे रहा है, वहीं आईडीए की स्कीम से ही खान नदी में गंदा पानी मिल रहा है। शहर की 20 फीसद आबादी आईडीए की बसाई कॉलोनियों में रहती है, जिसके रहवासियों द्वारा छोड़ा गया गंदा पानी नदी में सीधे सप्लाय हो रहा है। नियमानुसार आईडीए को इसे साफ करने के बाद ही नदी में छोडऩा था।


आईडीए की विकसित कॉलोनी अमितेषनगर, स्कीम-59 और स्कीम-103 खान नदी के नजदीक है। इन कॉलोनियों में आईडीए की सीवरेज लाइन का पूरा गंदा पानी सीधे खान नदी में गिर रहा है। इसी तरह से स्कीम 136 भी इसी नदी के मुख्य स्रोत से ही लगकर बसाई गई है। इसमें भी अभी तक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) नहीं बनाया है। स्कीम-94 का गंदा पानी खान नदी में उद्योगनगर के कोने पर ही सीधे नदी में छोड़ दिया जाता है।


नियम से चलें तो यह है फायदा

शहर की 20 फीसद

आबादी द्वारा छोड़ा गंदा पानी नदी में नहीं आएगा।

नदी की गंदगी में से 20 फीसदी हिस्सा स्वत: ही

समाप्त हो जाएगा।

नदी की सफाई का काम

बड़े स्तर पर शुरू हो पाएगा।

ट्रीटमेंट किया पानी छोडऩे

पर नदी में पानी की कमी को लेकर आ रही समस्या स्वत: ही समाप्त हो जाएगी।

इन नियमों के तहत है जरूरी


जल अधिनियम की धारा 24 व 25 के तहत गंदे पानी या ऐसा पानी, जिससे पानी में प्रदूषण फैलता है, उसे सीधे नहीं छोड़ा जा सकता। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत बनने वाले राज्य पर्यावरण प्रभाव आंकलन प्राधिकरण (सीआ) के नियमानुसार किसी भी नई कॉलोनी और बिल्डिंग को बनाते समय उसमें कॉलोनी से निकलने वाले सीवरेज को साफ करने के लिए पहले एसटीपी बनाना अनिवार्य है। उसके बगैर कॉलोनी विकसित नहीं की जा सकती। यह नियम सरकारी और गैर सरकारी सभी तरह के कॉलोनाइजर्स और बिल्डर पर लागू होता है।


सफाई योजनाओं पर सीधा असर

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नदी की सफाई योजनाओं पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। आईडीए की कई स्कीम खान नदी में मिलने वाले नालों के किनारे पर बसी हंै। इनमें स्कीम-54, 51, 114, 54 (पीयू) सहित कई कॉलोनियों का गंदा पानी सीधे नदी में मिल रहा है।


पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं

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नियमों के तहत कॉलोनी बसाने के लिए वायु, जल, मृदा प्रदूषण को लेकर पर्यावरण विभाग की क्लीयरेंस जरूरी है, लेकिन आईडीए ने आज तक किसी भी स्कीम में इसे नहीं लिया। बगैर क्लीयरेंस कॉलोनियों में काम शुरू करने पर सीआ ने कई बिल्डिंगों और कॉलोनियों में काम रुकवा दिया है।


प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की भी गलती

आईडीए द्वारा ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाने के बावजूद कॉलोनियों को विकसित कर बेचे जाने को लेकर कभी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी आपत्ति नहीं ली और न ही कभी आईडीए को नोटिस जारी किया।

हां, सही है कि ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बनाए गए। अब आगामी कॉलोनियों और बिल्डिंगों में एसटीपी का प्रावधान रख रहे हैं। पहले क्यों नहीं रखा गया, इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता।

- शंकर लालवानी, अध्यक्ष, आईडीए