
Hanuman temple
इंदौर। श्री रणजीत हनुमान मंदिर में नोटबंदी के दौरान करीब ढ़ाई करोड़ रुपए का चढ़ावा आया। प्रबंधन ने खाते में राशि जमा की जिस पर संज्ञान लेकर वर्ष 2019 में आयकर विभाग ने साढे 3 करोड़ की डिमांड का नोटिस जारी कर दिया। मंदिर ने आयकर कमिश्नर (अपील) के सामने अपील की। करीब चार साल बाद यह डिमांड को खत्म कर दिया गया है।
रणजीत हनुमान मंदिर को वर्ष 2019 में आयकर ने नोटिस देकर साढ़े 3 करोड़ की डिमांड राशि जमा करने के लिए निर्देशित किया था। प्रबंधन की ओर से अपील करने वाले सीए अभय शर्मा के मुताबिक, वर्ष 2016 में नवंबर-दिसंबर माह में मंदिर में करीब ढ़ाईकरोड़ का चढ़ावा आया था जिसे बैंक खाते में जमा किया गया। इसमें पुराने 500 व 1000 के नोट थे। आयकर ने इस जमा राशि के आधार पर नोटिस जारी किया था।
उस समय मंदिर न तो ट्रस्ट के अधीन था और न ही आयकर में धारा 12-ए एवं 80-जी में रजिस्टर्ड था। आयकर रिटर्न नहीं भरने पर आयकर ने साढ़े 3 करोड़ की डिमांड निकाल दी। मंदिर समिति के तत्कालीन प्रतिनिधि ने आयकर के सामने तथ्य रखे जिसे विभाग सहमत नहीं हुआ था।
तत्कालीन कलेक्टर लोकेश जाटव ने अपील करने के लिए सीए शर्मा को जिम्मेदारी दी।
अपील के लिए 20 प्रतिशत राशि जमा करना अनिवार्य होता है लेकिन मंदिर का मसला था इसलिए विभाग ने बिना राशि जमा किए सुनवाई शुरू की। अपील में बताया गया कि मंदिर का प्रशासक जिला कलेक्टर है और एडीएम सारी गतिविधियां देखते है। नोटिफिकेशन के आधार पर मंदिर जिला प्रशासन के अधीन था। चार साल तक सुनवाई चली। गुरुवार को अपील पर रणजीत हनुमान मंदिर के पक्ष में फैसला हुआ। अपील खारिज होती तो नियमानुसार विभाग 300 गुना तक पेनल्टी कर सकता था। यह बिना रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे धाॢमक स्थलों को टैक्स से मुक्ति दिलाने के लिए एक बड़ा फैसला है।
Published on:
09 Feb 2024 07:48 am
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