
इंदौर।
भदौरिया गु्रप के एबी रोड़ स्थित अमलतास होटल, इंडेक्स मेडिकल कॉलेज, अस्पताल व अन्य संस्थानों पर आज अल सुबह आयकर विभाग की टीम ने कार्रवाई की। कार्रवाई को पुरी तरह गोपनीय रखा गया था और एक साथ सभी स्थानों पर सर्वे शुरू किया गया। अलग अलग टुकडिय़ों में पुलिस के साथ पहुंचे आयकर अधिकािरयों ने होटल व कॉलेज में जाते ही रास्ते बंद करवा दिए और स्टॉफ को अंदर ही रोक लिया व पुछताछ शुरू कर दी। लंबे समय से भदौरिया ग्रुप के चैयरमेन सुरेश भदौरिया द्वारा बड़ी आयकर चोरी की जानकारी अधिकारियों को मिल रही थी। कार्रवाई के पहले ही अधिकारियों ने भदौरिया के खिलाफ सबुत जुटा लिए थे। भदौरिया ने देवास में भी अमलतास हॉस्पिटल और मेउिक्ल कॉलेज डाल रखा है। बता दें कि, पीएमटी-2012 घोटाले में सीबीआई ने स्पेशल कोर्ट में 592 आरोपियों के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट पेश की थी। जांच एजेंसी ने इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के सुरेश भदौरिया समेत लोगों को आरोपी बनाया था।
- सीबीआई ने की थी कार्रवाई
पीएमटी-2012 में चार्जशीट पेश करने के दो दिन बाद ही सीबीआई ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भोपाल-इंदौर में कई जगह छापे मारे थे। इंदौर से इंडेक्स मेडिकल कॉलेज की एडमिशन कमेटी के चेयरमैन अरुण अरोरा को विजय नगर स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था। दरअसल सीबीआई की गिरफ्त में आया अरुण अरोरा जबलपुर का रहने वाला है। वह इंडेक्स ग्रुप के चेयरमैन सुरेश सिंह भदौरिया का बेहद खास माना जाता है। पहले वह इंदौर के होटल अमलतास में मैनेजर था। बाद में उसे मेडिकल कॉलेज का जिम्मा दे दिया गया। मेडिकल कॉलेज की एडमिशन कमेटी में रहते हुए अरोरा ने मुंहमांगे दामों पर सीटें बेचीं। बिचौलिए और रैकेटियर से बातचीत करने और सीटों का सौदा करने का जिम्मा अरोरा का होता था। अरोरा पर आरोप था की उसने मेडिकल एजुकेशन के अफसरों को गलत जानकारी दी। एडमिशन सूची में बोगस नाम लिखकर भेजे।
- करोड़ो रूपए में बेचते थे सीटें
सीबीआई द्वारा जो चार्जशीट पेश की गई है उसमें भी जिक्र है की 2012 में इंडेक्स कॉलेज को स्टेट कोटे से 95 सीट आवंटित हुई थी। अरोरा ने डीएमई को सूचना दी कि 80 सीट पर 21 सितंबर 2012 को प्रवेश दे दिया गया है। 24 सितंबर को 2 सीट अपग्रेड हुई। दूसरी काउंसलिंग 17 सीट पर की गई। 18 स्कोरर यानी इंजन को एडमिशन देना बताया। इनमें से कुछ पहले से एमबीबीएस के छात्र थे। कॉलेज प्रबंधन खाली सीटों पर प्रवेश के लिए विज्ञापन नहीं दिया। डीएमई और कॉलेज की सूची में काफी अंतर था। 76 छात्रों को राज्य कोटा में प्रवेश दिखाया गया, जबकि ये योग्य नहीं थे। इसके साथ ही सीबीआई के स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सतीश दिनकर ने कोर्ट में कहा था कि इंडेक्स कॉलेज ने सरकारी कोटे की 97 सीटें करोड़ों रुपए में बेचीं। नाकाबिल स्टूडेंट्स को एडमिशन देकर काबिल स्टूडेंट्स का हक मारा गया। इससे उनका जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई मुश्किल है।
Updated on:
24 Mar 2018 10:19 am
Published on:
23 Mar 2018 10:29 am
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