
योग का बढ़ा क्रेज, स्कूल ऑफ योगा ने डबल की सीटें
इंदौर. कोरोना के बाद शरीर को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए लोगों ने योग को दिनचर्या में शामिल कर लिया है। बदलते दौरान में विद्यार्थियों में भी योग का क्रेज बढ़ रहा है। वे योग को कॅरियर के तौर पर ले रहे हैं। पिछले तीन साल में प्रोफेशनल कोर्सेस के साथ विद्यार्थियों का रुझान योग की ओर बढ़ा है। इसी के चलते देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ योगा ने 100 फीसदी सीटें बढ़ाई हैं।
स्कूल ऑफ योगा में योग के साथ थैरेपी भी सिखाई जाती है, ताकि बीमारी का इलाज किया जा सके। योग थैरेपी में मरीजों का स्टेप बाय स्टेप इलाज होता है। इससे लोगों को फायदा भी हो रहा है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी में भी योग को कोर सब्जेक्ट बनाया गया है। बीए, बीएससी, एमएससी और सर्टिफिकेट कोर्स कर विद्यार्थी योग में कॅरियर बना रहे हैं।30 से 50 और अब 200 सीटें
डीएवीवी के स्कूल ऑफ योगा में एमए में पहले 30 सीटें थी, जिसे बढ़ाकर 50 किया गया। सर्टिफिकेट कोर्स के लिए 100 सीटें थीं, जिसे 200 कर दिया गया है। इतनी सीटें बढ़ने और फीस ज्यादा होने के बाद भी सीटें जल्दी फुल हो जाती हैं। हालांकि बीएससी की 50 सीटें ही हैं। कॅरियर ऑप्शन बढ़ने से इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, सीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थी भी इसमें एडमिशन ले रहे हैं। करीब 20 फीसदी विद्यार्थी खुद का काम शुरू कर रहे हैं। बाकी योग प्रशिक्षक के रूप काम कर रहे हैं।
योग थैरेपी से इन बीमारियों का इलाज
योग थैरेपी से स्पाइरल डिसऑर्डर (स्पाइरल पैन, साइटिका, स्लिप डिस्क), डाइजेस्टिव डिसऑर्डर (एसिडिटी, अस्थमा, पाइल्स), थायराइड, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, फ्रोजन शोल्डर, फैटी लिवर, इनफर्टिलिटी आदि का इलाज किया जा रहा है। हर महीने योग थैरेपी के लिए करीब 500 मरीज पहुंचते हैं। इनमें ज्यादातर स्पाइरल डिसऑर्डर वाले होते हैं।
Published on:
17 Aug 2023 05:42 pm
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