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‘4 महीने की प्रेग्नेंट थी सिमरन…’, खुशियों वाले घर से एक साथ उठीं 8 अर्थियां

Indore Fire Tragedy: इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर मनोज की बड़ी बहू सिमरन की है, जो दूसरी बार मां बनने वाली थी।

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Indore Fire Tragedy

Indore Fire Tragedy (Photo Source - Patrika)

Indore Fire Tragedy: इंदौर शहर में बीते दिन जब एक साथ घर से 8 अर्थियां उठीं तो पूरे शहर में मातम छा गया। किसी को नहीं पता था कि काली रात के बाद सुबह इतनी गमगीन होगी। शहर के तिलक नगर थाना क्षेत्र के बंगाली चौराहा स्थित बृजेश्वरी एनएक्स में मंगलवार-बुधवार की रात ईवी कार से भड़की आग और बिजली के खंभे में शॉर्ट सर्किट ने दो परिवारों के आठ सदस्यों को निगल लिया। बुधवार दोपहर जिला अस्पताल के पोस्टमॉर्टम रूम से एक के बाद एक क्षत-विक्षत शव बाहर आए तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। बेहद दर्दनाक दृश्य तब सामने आया, जब एक मासूम का शव छोटे बॉक्स में रखकर लाया गया।

गर्भवती थी बड़ी बहू

इस हादसे की सबसे मार्मिक तस्वीर मनोज की बड़ी बहू सिमरन की है, जो दूसरी बार मां बनने वाली थी। उसे चार माह का गर्भ था। परिवार ने इस बार उसकी प्रेग्नेंसी को बहुत सीमित लोगों तक ही रखा था, क्योंकि पिछली प्रेग्नेंसी में उसने जो दर्द झेला था, वह अब भी ताजा था। रिश्तेदार बताते हैं कि सिमरन पहले जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली थी, लेकिन किडनी इन्फेक्शन के चलते दोनों बच्चों को बचाया नहीं जा सका। उस समय डॉक्टर्स ने भी हालात को बेहद गंभीर बताया था और ऑपरेशन करना पड़ा था।

बेटे का दर्द…

बेटे का कहना है कि थोड़ा सा टाइम मिलता तो मैं सबको बचा लेता। आंख खुली तो चारों तरफ धुआं था घर का एक बेटा सोमिल पीएम रूम में सिसकते हुए रिश्तेदारों को दर्दनाक मंजर की दास्तां सुना रहा था। सिसकते हुए बताया कि नींद खुली तो पूरे घर में धुआं था। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। बड़े भाई सौरभ, सोमिल खुद और मां सुनीता ने बालकनी की जाली तोड़कर पड़ोसियों की सीढिय़ों की मदद से जान बचाई। हादसे में सब कुछ खत्म हो चुका है। सोमिल की हालत देखकर रिश्तेदार भी अपने आप को संभाल नहीं पा रहे थे। हादसे का दर्द बयां करते हुए सोमिल रोता रहा। कभी दोस्त तो कभी रिश्तेदार उसे ढांढस बंधाते रहे।

कोई डिजिटल लॉक नहीं था

परिजन ने बताया कि सिमरन व अन्य सदस्य छत के चैनल गेट तक पहुंच गए थे, लेकिन वहां ताला होने से बाहर निकलने का समय नहीं मिला और वहीं जान चली गई। घर में 15 साल से काम करने वाली महिला ने मीडिया को बताया कि घर में चाबी वाले ताले थे। कोई डिजिटल लॉक नहीं था। दो गैस टंकी बालकनी तो दो छत पर रखी थी। बड़ी बहू सिमरन गर्भवती थी। सौरभ परिवार के सदस्यों के साथ घर पहुंचे। उन्होंने कमरे से जरूरी दस्तावेज, जेवरात निकाले। एक कमरे में तो जेवरात सुरक्षित मिले, लेकिन अन्य कमरे में जेवरात जलने की बात पता चली। सौरभ ने बताया, घर के किसी भी दरवाजे पर डिजिटल लॉक नहीं था। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, तुलसीराम सिलावट, विधायक महेंद्र हार्डिया भी मौके पर पहुंचे थे।

अवशेष सैंपल के रूप में जब्त

एफएसएल अधिकारी ने क्षतिग्रस्त घर से सैंपल के रूप में अवशेष जब्त किए हैं। पता लगाया जाएगा कि आग लगने के कारण क्या हैं। घर के डेकोरेशन में पोलीमर का उपयोग हुआ। प्रत्येक बेडरूम में एसी था। आग की चपेट में आने से एसी के कंप्रेशर भी तेज आवाज के साथ फटे। गैस सिलेंडर के अवशेष भी मिले हैं।

पांच से अधिक गैस सिलेंडर पुलिस ने बाहर निकाले हैं। इसके बाद बिजली कंपनी और इलेक्ट्रिक सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारी जांच करते रहे। कुछ अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में ईवी कार चार्जिंग के दौरान आग फैलना बताया। जली कार की बैटरी में बलास्ट हुए। कार घर के पोर्च के पास खड़ी थी। उसके पास बिजली का खंभा था।

कार में आग लगने के समय बिजली के खंभे में भी शॉर्ट सर्किट हुआ। पोर्च में खड़े सभी दोपहिया वाहनों में आग लगी। वाहनों में लगी आग पूरे घर में फैली। घर के लग्जरी इंटीरियर में पोलीमर, फर्नीचर का इस्तेमाल होने से आग ने विकराल रूप ले लिया। घर में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। रूफ टॉप पर सोलर सिस्टम लगा है। ओपन जिम भी है। छत के स्टोर रूम तक आग पहुंची। परिवार को निकालने के लिए खिड़की की ग्रिल भी तोड़ी गई थी।