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कई गुना महंगी बेची जा रही 5 रुपए वाली पैरासिटामॉल, इंदौर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

दवा-मेडिकल जांच की दरों में अंतर पर मांगा जवाब, केंद्र के आदेश क्यों नहीं मान रही राज्य सरकार: हाईकोर्ट

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Indore High Court issues notice to the government regarding disparities in medicine prices

Indore High Court issues notice to the government regarding disparities in medicine prices (फोटो- freepik)

Indore - इंदौर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनोद सर्राफ की युगलपीठ ने मेडिकल जांच और दवाइयों की कीमतों में असमानता पर दायर जनहित याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस दिया है। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि जब केंद्र सरकार ने आदेश जारी कर दिया है तो राज्य सरकार इसका पालन सुनिश्चित क्यों नहीं करवा रही है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और मेडिकल काउंसिल से इसका जवाब मांगा है। उन्हें कोर्ट को चार सप्ताह में इसका जवाब पेश करना होगा। याचिका में बताया गया है कि न केवल दवाइयों की कीमतें अलग अलग ली जा रहीं हैं बल्कि मेडिकल जांच के रेट भी अलग-अलग वसूले जा रहे हैं। कुछ डॉक्टर दूसरी जगह की रिपोर्ट को मान्यता ही नहीं देते।

अभिभाषक आसुदानी ने साफ कहा कि केंद्र की स्पष्ट गाइडलाइन होने के बाद भी राज्य सरकार इसे नहीं मान रही हैं, जिससे दवा और मेडिकल जांच के नाम पर आम लोगों से लूट की जा रही

मेडिकल जांच और दवाइयों की कीमतों में असमानता पर इंदौर हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता रमण रावल ने यह जनहित याचिका दायर की है। उनकी ओर से वरिष्ठ अभिभाषक विजय कुमार आसुदानी कोर्ट में पेश हुए और अपनी दलीलें दीं। अभिभाषक आसुदानी ने साफ कहा कि केंद्र की स्पष्ट गाइडलाइन होने के बाद भी राज्य सरकार इसे नहीं मान रही हैं, जिससे दवा और मेडिकल जांच के नाम पर आम लोगों से लूट की जा रही है।

फॉर्मूला एक, लेकिन कीमतें अलग-अलग, इन दवाइयों की सूची भी कोर्ट में पेश

याचिका में कोर्ट को बताया कि एक ही तरह और एक फॉर्मूले से बनी अलग अलग कंपनियों की दवाइयों की कीमतें अलग-अलग हैं। जैसे पैरासिटामॉल की एक टेबलेट की किसी कंपनी द्वारा 5 रुपए कीमत तय है, जबकि उसी को अन्य कंपनियां ज्यादा दाम में बेच रही हैं। याचिकाकर्ता ने ऐसी अनेक दवाइयां गिनाईं जिनकी अलग अलग कीमतें वसूली जा रहीं हैं। इन दवाइयों की सूची भी कोर्ट में पेश की।

मेडिकल जांच के रेट भी लैब और निजी अस्पताल अलग-अलग वसूल रहे, अगर कोई मरीज सस्ती लैब से जांच कराता है तो कुछ डॉक्टर उसे मान्यता नहीं देते

अभिभाषक आसुदानी ने बताया कि इसी तरह मेडिकल जांच के रेट भी लैब और निजी अस्पताल अलग-अलग वसूल रहे हैं। अगर कोई मरीज सस्ती लैब से जांच कराता है तो कुछ डॉक्टर उसे मान्यता नहीं देते। याचिकाकर्ता ने इस मनमानी पर रोक लगाने की मांग की है।