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108 किलो वजनी पति की किडनी खराब, पत्नी ने अंगदान कर बचाई जान

MP News: इंदौर शहर के निजी अस्पताल में 100 किलो से अधिक वजन वाले मरीज का सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट(Indore kidney transplant) किया गया है।
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इंदौर

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Avantika Pandey

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Updated: 13 Nov 2025, 11:07 AM IST

Indore kidney transplant

Indore kidney transplant पत्नी ने दी किडनी, 108 किलो वजनी पति की बची जान

MP News: इंदौर शहर के निजी अस्पताल में 100 किलो से अधिक वजन वाले मरीज का सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट(Indore kidney transplant) किया गया है। आमतौर पर इस तरह के मरीजों को उनके अधिक वजन के कारण दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में रेफर किया जाता है। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।

महमूद को पत्नी नजमा ने दी किडनी

धार जिले के रहने वाले 47 वर्षीय महमूद मोहमद वर्ष 2018 से क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) से पीड़ित थे। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें यह समस्या मोटापा और ब्लड प्रेशर से हुई थी। 2022 में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि डायलिसिस पर जाना पड़ा। करीब तीन साल डायलिसिस पर रहने के बाद 1 सितंबर 2025 को उनका किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। महमूद को किडनी उनकी पत्नी नजमा ने दी है।

108 किलो वजन

डॉ. जय सिंह अरोरा ने बताया, जब मरीज अस्पताल आए तब वजन 108 किलो था। अधिक चर्बी और वजन के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। पत्नी का वजन 70 किलो था। साइज में फर्क के कारण ट्रांसप्लांट(Indore kidney transplant) कठिन था। विशेषज्ञ टीम ने यह सर्जरी पूरी तरह दूरबीन (लेप्रोस्कोपिक) तकनीक से की। ट्रांसप्लांट के बाद महमूद का वजन घटकर 96 किलो रह गया है। ट्रांसप्लांट के बाद नजमा को चार दिन में ही डिस्चार्ज कर दिया था, जबकि महमूद को 12 दिन बाद छुट्टी मिली।

पत्नी की किडनी में थे स्टोन, फिर भी नहीं रुकी प्रक्रिया

डॉ. अंशुल अग्रवाल ने बताया, जांच में पता चला कि नजमा की किडनी में छह से सात स्टोन हैं। इसके बावजूद उन्होंने निर्णय नहीं बदला। सर्जरी के दौरान जब किडनी बाहर निकाली गई तब हमने उसमें से सारे स्टोन 15 मिनट में निकाल दिए और ट्रांसप्लांट कर दिया। डॉ. अरोरा ने बताया, डायलिसिस पर रहने वाले मरीजों का पांच साल बाद सर्वाइवल रेट लगभग 50 प्रतिशत होता है, जबकि ट्रांसप्लांट के बाद यह दर 96 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।