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जूनी इंदौर ब्रिज भी बना एक्सीडेंट जोन

- ट्रैफिक पुलिस के एक्सीडेंट सेल की रिपोर्ट से हुआ खुलासा, - नवंबर में जूनी इंदौर ब्रिज और रेडिसन चौराहे पर हुई 4-4 दुर्घटनाएं

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Sanjay Bhandari

Dec 24, 2015


इंदौर.
जूनी इंदौर ब्रिज के रूप में शहर में नया एक्सीडेंट जोन सामने आया है। ट्रैफिक पुलिस के एक्सीडेंट सेल की नवंबर की रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक बीते माह रेडिसन चौराहा और जूनी इंदौर ब्रिज पर 4-4 दुर्घटनाएं हुई हैं। रेडिसन चौराहा पहले से ही एक्सीडेंट जोन घोषित है। चोइथराम, राजेंद्रनगर व व्हाइट चर्च चौराहा पर 3-3 दुर्घटनाएं हुई हैं।


गत वर्ष से ज्यादा


सेल ने हाल में रिपोर्ट अफसर व पुलिस मुख्यालय को भेजी है। इसमें बताया है, नवंबर 2015 में जिले में 505 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 38 लोगों की मौत व 401 घायल हुए हैं। नवंबर 2014 में 461 दुर्घटनाएं हुई थीं, जिनमें 33 लोगों की मौत व 380 घायल हुए थे। अक्टूबर 2015 में 489 दुर्घटनाओं में 29 लोगों की मौत हुई थी और 399 घायल हुए थे।


इसलिए खतरनाक जूनी इंदौर ब्रिज


जूनी इंदौर ब्रिज पर दुर्घटनाओं का कारण ऊपरी हिस्से में लोगों का डिवाइडर फांदकर दूसरी ओर जाना और साथ ही जूनी इंदौर थाने के लिए मोड़ का संकरा होना है। डीएसपी गोविंद बिहारी रावत का कहना है, मोड़ संकरा होने से कई वाहनों को दिक्कत आती है। एक ओर वाहन मुड़ता रहता है और दूसरी ओर तेजी से आने वाला चालक संतुलन नहीं बनाए रख पाता है और दुर्घटना हो जाती है।


विजयनगर क्षेत्र सबसे आगे


रिपोर्ट में बताया है, शहर के अंदरूनी हिस्सों में भी लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। इसमें विजयनगर इलाका सबसे आगे है।


थाना क्षेत्र दुर्घटना

विजयनगर 32


संयोगितागंज 27

तुकोगंज 26


भंवरकुआं 22

राजेंद्रनगर 20


लापरवाही व गति मुख्य कारण

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रिपोर्ट में ट्रैफिक टीआई का मत है, वाहन चालकों द्वारा लापरवाही व तेज गति से वाहन चलाने के कारण दुर्घटनाएं होती हैं। पुलिस इसके लिए लोगों को लगातार समझाइश देती है।


ठंड में बढ़ती हैं दुर्घटनाएं

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ठंड में वाहन चालकों को सावधानी से वाहन चालने की जरूरत है। अक्टूबर के बाद नवंबर से लेकर जनवरी तक ज्यादा दुर्घटनाओं का खतरा रहता है। नवंबर के बाद कोहरे के कारण दृश्यता की समस्या होती है। ठंड के मौसम में वाहन चालक लगातार गाड़ी चलाने के कारण जल्दी थक जाते हैं। ऐसे मौसम मेें नींद के झोंके भी एक्सीडेंट के लिए जिम्मेदार हैं।


- प्रफुल्ल जोशी, ट्रैफिक एक्सपर्ट


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