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Chaitra Navratri 2023 : ‘मां तुलजा भवानी’ को ढूंढते हुए आते हैं महाराष्ट्रीयन भक्त, होता है गरबे का आयोजन

पश्चिम मुखी माता की प्रतिमा की सेवा रहवासियों द्वारा की जाती है...

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Maa Tulja Bhavani

इंदौर/कमाठीपुरा। क्षेत्र में तुलजा भवानी मंदिर का भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर की महिमा ऐसी है कि महाराष्ट्रीयन परिवार इसे ढूंढते हुए दर्शन करने पहुंचते हैं। शेर पर सवार माता के हाथों में अस्त्र शोभायमान हैं तो भक्तवत्सल मां भक्तों पर आशीष लुटातीं नजर आतीं हैं। माता का मुकुट रंगीन नगों से सुशोभित हैं। मुकुट में रजत और स्वर्ण रंग के मोतियों का इस्तेमाल हुआ है। मां तुलजा भवानी के मंदिर में मोर पंख से डिजाइन बनाई गई है, जो देखने वालों का मन मोह लेती है। माता की प्रतिमा श्वेत मार्बल की है। पश्चिम मुखी माता की प्रतिमा की सेवा रहवासियों द्वारा की जाती है।

महाराष्ट्रीयन की कुलदेवी हैं भवानी मां

मां तुलजा भवानी की 20 वर्षों से सेवा कर रहीं सपना गौड़ ने बताया कि मंदिर और माता की स्थापना सन् 1984 में रहवासियों के सहयोग से हुई थी। पहले माता की प्रतिमा मिट्टी की थी। रहवासियों की मंशानुसार माता की मार्बल की प्रतिमा लाई गई। मोहल्ले में अधिकतर महाराष्ट्रीय परिवार ही निवास करते थे। तुलजा भवानी मां महाराष्ट्रीयन की कुलदेवी हैं। महाराष्ट्र के तुलजापुर में मां तुलजा भवानी का मंदिर है। तुलजा भवानी के मंदिर के बहुत कम दर्शन लाभ होते हैं। यहां लोग माता दर्शन के लिए खोजते-खोजते आते हैं। इसके अलावा एक मंदिर तिलक नगर में भी बताया जाता है।

शारदीय नवरात्र में 40-45 नन्हीं-नन्हीं बालिकाओं द्वारा माता का गरबा कार्यक्रम होता है। माता और बालिकाओं की सेवा कार्य चलता रहता है। बालिकाओं के लिए नाश्ता भी रखा जाता है।