
mp election 2023
मध्यप्रदेश की सत्ता में वही राजनीतिक दल काबिज होता है, जिसका साथ मालवा-निमाड़ देता है। 2013 और 2018 विधानसभा चुनाव के नतीजे इसके गवाह हैं। 2013 के चुनाव में इंदौर और उज्जैन संभाग की 66 सीटों में से 56 पर फतह हासिल की थी। पार्टी के प्रत्याशी बम्पर वोटों से जीते थे। हारने वाली सीटों का अंतर भी बहुत कम था। 2018 में 66 में से भाजपा के खाते में 27 विधानसभा ही हाथ आई, जबकि 39 विधानसभा जीतकर कांग्रेस ने सरकार बनाई। परिणाम चौंकाने वाले थे, क्योंकि 2013 में पार्टी ने जिन सीटों को हजारों वोटों से जीता था, उन पर करारी हार मिली थी। ऐसा नहीं था कि ये हार आदिवासी सीटों पर ही हुई। उज्जैन संभाग की विधानसभाओं के परिणाम भी अपेक्षा से उलट थे।
जयस का नजर आया असर
सबसे ज्यादा असर इंदौर संभाग की आदिवासी सीटों पर पड़ा। 2008 में भी भाजपा ने जहां 30 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की थी। वही सीट 25 हजार से अधिक मतों के अंतर से हार गए। इसका कारण जयस का असर बताया जा रहा था।
बगावत व नाराजगी का असर
मालवा-निमाड़ की 24 सीटें ऐसी हैं, जिसमें पांच साल में हजारों वोटों का अंतर आया। इसमें से कुछ सीटें ऐसी भी हैं, जिसमें हार का कारण पार्टी से बगावत रही। बदनावर और महेश्वर में बागी ने चुनाव लड़ा और पार्टी प्रत्याशी तीसरे नंबर पर आ गया। इसके अलावा इंदौर एक, सोनकच्छ, बड़वाह, बुरहानपुर और नेपानगर में भी भितरघात हुआ।
भाजपा की हार-जीत का अंतर
विधानसभा - 2013 - 2018
इंदौर एक 54176 - 8163
देपालपुर 30174 -10506
सेंधवा 25686 -15878
बुरहानपुर 22827 - 5120
नेपानगर 22178 -1264
आलीराजपुर 17369- 21962
सांवेर 17421 - 2945
पेटलावद 17061 - 31151
बदनावर 9812 -41506
मनावर 1639 -39501
सरदारपुर 529 -36205
पानसेमल 7382 - 25222
महेश्वर 4727 -35836
बड़वाह 5630 - 30508
जोबट 11051 -2056
नागदा 16115 - 5117
तराना 16135 - 2209
घट्टिया 17369 -4628
बड़नगर 13135-5381
कालापीपल 9573-13699
शाजापुर 8656-44979
आगर 28859-2490
सैलाना 2079-28498
Published on:
15 Oct 2023 07:44 am
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