
प्रदेश का बोन बैंक
इंदौर. देशभर में नी-रिप्लेसमेंट सर्जरी knee replacement surgery अब 6 गुना बढ़ चुकी है. इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन Indian Orthopedic Association एमपी चेप्टर की 40वीं नेशनल कॉन्फ्रेंस यह बात बताई गई. कॉन्फ्रेंस में एमजीएम मेडिकल कॉलेज MGM Medical College Indore के डीन डॉ. संजय दीक्षित ने मेडिकल कॉलेज में प्रदेश के पहले बोन बैंक bone bank को बनाने की घोषणा भी की।
इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन एमपी चेप्टर की नेशनल कॉन्फ्रेंस का औपचारिक उद्घाटन शनिवार को हुआ। कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट जस्टिस जेके माहेश्वरी मुख्य अतिथि और एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. संजय दीक्षित बतौर विशेष अतिथि शामिल हुए। डॉ. दीक्षित ने प्रदेश के पहले बोन बैंक को बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा, हम जल्द एमजीएम मेडिकल कॉलेज में बोन बैंक बनाने जा रहे हैं, जिसका फायदा मरीजों के साथ डॉक्टर्स को भी होगा।
जस्टिस माहेश्वरी ने कहा, चिकित्सकों की सामाजिक छवि ईश्वर के समान है। मैंने हमेशा चिकित्सकों को समाज के लिए अच्छा करते देखा है, इसलिए उनको परोपकार से पीछे नहीं हटना चाहिए। आने वाली पीढ़ी को भी समाजसेवा के हित में काम करना सीखना चाहिए। मेडिकल कॉलेज
इस दौरान डॉ. डीके तनेजा को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। मौक पर इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन एमपी चैप्टर के सेक्रेटरी डॉ. साकेत जती ने संक्रमण को कैंसर और हार्ट की बीमारी जैसा घातक बताया। समारोह में को-ऑर्गनाइजिंग सेके्रटरी डॉ. अरविंद वर्मा जांगिड़ को भी सम्मानित किया गया।
150 से ज्यादा लेक्चर सेशन हुए
कॉन्फ्रेंस के ऑर्गेनाइजिंग सेके्रटरी डॉ. मनीष माहेश्वरी ने कहा, पहले दिन 3 कैडेवरिक वर्कशॉप अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में हुई, जिसमें नी रिप्लेसमेंट, कूल्हे के आसपास की हड्डियों के फ्रैक्चर, स्पाइन सर्जरी की हैंड्स ऑन ट्रेनिंग दी गई। दूसरे दिन 150 से ज्यादा लेक्चर सेशन हुए।
जरूरी नहीं जोड़ प्रत्यारोपण
पुणे के सीनियर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. पराग संचेती ने बताया, गठिया की बीमारी पहले 65-70 की उम्र में दिखती थी, अब 45-50 की उम्र के लोग प्रायमरी ओस्टियो आर्थराइटिस से पीडि़त हैं। लोग ये नहीं जानते कि रिप्लेसमेंट से पहले इसके और भी इलाज मौजूद हैं। एक्सरसाइज, लाइफ स्टाइल में बदलाव, पालती मार के नहीं बैठना और वजन कम रखना जरूरी है। फिर भी आराम नहीं लगता है तो इंजेक्शन उपलब्ध हैं, जिससे दर्द कम होता है।
अब 3 लाख ऑपरेशन हर साल
डॉ. संचेती ने कहा, इन दिनों ज्वॉइंट प्रिजर्वेशन सर्जरी को बहुत महत्व दिया जा रहा है। इसमें बैंड हो चुकी हड्डी को चीरा लगा कर सीधा किया जाता है। पहले 50 हजार सर्जरी साल में होती थी, अब 3 लाख नी-रिप्लेसमेंट देश में होते हैं।
Published on:
09 Oct 2022 08:12 am
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