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परमारकालीन मंदिर में अधिकारी झुकाते हैं सर, राजा भोज को यहीं से मिला था सम्मान

राजाभोज के शासन काल के समय से धार में स्थित धारेश्वर महादेव के मंदिर की कई कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें से कई तो आज तक देखी और सुनी जाती है।

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Kamal Singh

Jan 02, 2017

religious traditions of dhareshwar mahadev temple

religious traditions of dhareshwar mahadev temple dhar


इंदौर/धार. मध्यप्रदेश के धार जिले के राजाभोज विश्वभर प्रसिद्ध है। राजभोज की प्रसिद्धि का कारण धार के बाबा धारनाथ, धारेश्वर महादेव है। राजाभोज के शासन काल के समय से धार में स्थित धारेश्वर महादेव के मंदिर की कई कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें से कई तो आज तक देखी और सुनी जाती है।

दरअसल राजभोज अपने दरबार में जाने से पहले यहां मंदिर में दर्शन करने आते थे, इसके बाद ही वे अपने दरबार में जाते थे। यही परंपरा आज भी जीवंत हैं। धार शहर में कोई भी अधिकारी ज्वाइन होता है तो सबसे पहले भगवान धारनाथ के दरवाजे पर मत्था टेकता है। इसके बाद ही अपनी नौकरी शुरू करता है।

धारेश्वर की यात्रा में पैदल चलते थे राजाभोज
धारेश्वर मार्ग स्थित भगवान धारनाथ मंदिर राजा भोज के समय का है। भगवान धारनाथ की सवारी सावन माह में सभी सोमवार को निकाली जाती है। धारनाथ पालकी पर बैठकर भक्तों का हाल जानने निकलते हैं। माना जाता है कि ये धार के राजा हैं और प्रजा का हाल जानने स्वयं नगर भ्रमण पर निकलते हैं। यह परंपरा राजा भोज के समय से चली आ रही है। राजा खुद इस पालकी यात्रा में पैदल चलते थे।

religious traditions of dhareshwar mahadev temple

60 किमी दूर है इंदौर से
इंदौर के संभागायुक्त संजय दुबे जब धार कलेक्टर हुआ करते थे, तो उन्होंने इस मंदिर के कायाकल्प का बीड़ा उठाया था। आज मंदिर परिसर में सुंदर बगीचा, फव्वारा लोगों को आकर्षित कर रहे है। लोग यहां परदर्शन के बाद घंटों बगीचे में बैठे रहते है। धार के धारेश्वर मंदिर की दूरी इंदौर से 60 किमी है। श्रावण मास में बाबा का छबीना निकाला जाता है। छबीने की परंपरा भी वर्षों पुरानी है। बाबा को पुलिस बल द्वारा गार्ड आफ आनर दिया जाता है इसके बाद बाबा प्रजा का हाल जानने के लिए शहर भर का भ्रमण करते है। पहली पूजा और आरती कलेक्टर, विधायकों के द्वारा की जाती है। बाबा धारनाथ को धार का अधिपति राजा भी माना जाता है।


मंदिर का इतिहास
साहित्यकार दीपेंद्र शर्मा के अनुसार धारेश्वर, महाकाल की भांति ही धार निवासियों के लिए श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। परमार कालीन राजा भोज के आराध्य देव रहे हैं। मंदिर का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व हजारों वर्षों से हैं।

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