
Plastic waste road construction (Photo- Patrika)
बैकुंठपुर। छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले में पीएमजीएसवाई ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष पहल की है। उन्होंने पहली बार प्लास्टिक वेस्ट (Plastic waste road) से 2 किलोमीटर की पक्की सडक़ बनाई है। यह सामान्य डामरीकृत सडक़ से अधिक टिकाऊ और जलरोधी होगी। वहीं प्रति किलोमीटर निर्माण में 30 हजार तक बचत भी होगी। खबर में हम आपको प्लास्टि वेस्ट से कैसे सडक़ बनाई जाती है, इसका प्रोसेस भी बताएंगे।
एमसीबी जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तहत ग्राम पंचायत परसगढ़ी में पीडब्ल्यूडी सडक़ से मेंड्राडोल होकर भर्रीडांड तक 2 किलोमीटर सडक़ (Plastic waste road) का निर्माण कराया गया है। इसकी खास बात यह है कि सडक़ निर्माण में प्लास्टिक अपशिष्ट का उपयोग हुआ है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण अंतर्गत ग्राम पंचायत चनवारीडांड़ में स्थापित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाई से प्लास्टिक अपशिष्ट लिया गया है। जिसे डामर के साथ मिश्रित कर सडक़ निर्माण (Plastic waste road) में उपयोग किया गया। प्लास्टिक मिश्रण से निर्मित सडक़ की गुणवत्ता सामान्य डामर सडक़ की तुलना में अधिक टिकाउमानी जा रही है।
पीएमजीएसवाई के मुताबिक डामर से बनी सडक़ 4-5 साल तक चलती है, जबकि प्लास्टिक अपशिष्ट मिश्रण (Plastic waste road) से बनी सडक़ 6-7 साल तक चलेगी। साथ ही डामर की खपत कम होने से प्रति किलोमीटर लगभग 30 हजार बचत होती है।
बताया जा रहा है कि 1 किलोमीटर लंबी सडक़ बनाने में डामर के साथ एक टन कटिंग प्लास्टिक का उपयोग होता है। उससे पहले सिंगल यूज प्लास्टिक (Plastic waste road) एकत्र कर पृथक्करण, सफाई और श्रेडिंग के बाद सडक़ निर्माण में उपयोग करते हैं। प्लास्टिक मिश्रण से बनने वाली सडक़ को मजबूत, टिकाऊ और जलरोधी होने की बात कही गई है।
साथ ही डामर और प्लास्टिक से बनने वाली सडक़ को लगभग 6-7 साल तक मरम्मत की आवश्यकता नहीं पड़ती है। बताया जा रहा कि प्लास्टिक वेस्ट को कटर मशीन से कैरीबैग, अनुपयोगी प्लास्टिक को काटकर एक घंटे में लगभग 10 किलोग्राम कटिंग प्लास्टिक का टुकड़ा बनाते हैं।
इसे डामर के साथ मिश्रित कर सडक़ (Plastic waste road) बनाने में उपयोग किया जाता है। प्लास्टिक व डामर मिश्रण से सडक़ बनने के बाद वहां की मिट्टी की उर्वरकता बनी रहती है और पर्यावरण की सुरक्षा होती है।
पीएमजीएसवाई मनेंद्रगढ़ के कार्यपालन अभियंता मोतीराम सिंह का कहना है कि वर्ष 2023-24 में जिले की 5.49 किलोमीटर लंबी 3 सडक़ में प्लास्टिक मिश्रण (Plastic waste road) से रिपयेरिंग की गई थी। इसके बेहतर परिणाम देखने को मिले है। उसी आधार पर आने वाले समय में अन्य सडक़ों में भी प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग किया जाएगा।
Published on:
02 Jan 2026 06:54 pm
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