इंदौर

यहां सिर के बल उल्टे विराजित हैं हनुमानजी, पौराणिक कथा से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

Patalgami Hanuman: मध्य प्रदेश में उल्टे हनुमानजी के चमत्कारी मंदिर यानी पातालगामी हनुमान आस्था का बड़ा केंद्र है। इस मंदिर के पीछे एक ऐसी पौराणिक कहानी है जो काफी रोचक है। हर हनुमान जयंती पर यहां भक्तों का तांता लगता है।

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Apr 11, 2025

Patalgami Hanuman: भारत में भगवान राम के जितने मंदिर हैं, लगभग उतने ही उनके परमभक्त हनुमानजी के भी मंदिर हैं। लेकिन इन सब में एक मंदिर ऐसा भी है जो अपनी अद्वितीय प्रतिमा के कारण विशिष्ट स्थान रखता है। मध्य प्रदेश के सांवेर में स्थित 'उल्टे हनुमानजी' का मंदिर अपने अनोखे स्वरूप और पौराणिक महत्त्व के चलते आज देशभर के श्रद्धालुओं का आस्था केंद्र बन गया है।

सिर के बल विराजित हैं पवनपुत्र

देशभर में हनुमानजी के हजारों मंदिरों में कहीं भी उनकी प्रतिमा सिर के बल नहीं दिखाई देती, परंतु सांवेर का यह मंदिर एक अपवाद है। यहां विराजमान हनुमानजी की प्रतिमा उलटी अवस्था में, सिर के बल स्थापित है – जो भक्तों के लिए विस्मय और श्रद्धा दोनों का विषय है। मंदिर को कुछ वर्ष पूर्व भव्य स्वरूप दिया गया, किन्तु प्रतिमा की प्राचीनता आज भी रहस्य बनी हुई है। यह अद्भुत दृश्य भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है और हर कोई इसे एक बार निहारने अवश्य आता है।

यहां विराजते हैं चमत्कारी हनुमानजी


यह मंदिर मध्यप्रदेश के इंदौर-उज्जैन फोरलेन के बीच स्थित सांवेर नगर में स्थित है। इंदौर से मात्र 30 किलोमीटर और उज्जैन से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थल अब भक्तों की नियमित यात्रा का प्रमुख पड़ाव बन चुका है। यहाँ आने वाले भक्त न केवल उल्टे हनुमानजी के दर्शन करते हैं, बल्कि श्रीराम दरबार और शिव-पार्वती की भी प्रतिमाओं के समक्ष नतमस्तक होते हैं।

एसडीएम ने दिलाई थी पहचान

करीब दो दशक पहले तक इस मंदिर के अस्तित्व से अधिकांश लोग अनजान थे। मंदिर नगर से बाहर एकांत में स्थित होने के कारण वहां केवल पुजारी ही दर्शन करता था। लेकिन 22 साल पहले जब कौशल बंसल सांवेर के एसडीएम नियुक्त हुए, तो उन्होंने इस सुनसान मंदिर की ओर रुख किया। वहां उन्होंने हनुमानजी की उलटी प्रतिमा देखी और इसे अद्वितीय मान प्रचार-प्रसार में जुट गए। उन्होंने मंदिर के कायाकल्प की प्रक्रिया शुरू की और देखते ही देखते यह मंदिर हजारों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बन गया।

पौराणिक कथा से जुड़ी मान्यता

इस मंदिर के वर्तमान पुजारी पं. नवीन व्यास के अनुसार, मंदिर की स्थापना से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। त्रेतायुग में जब भगवान राम और रावण के बीच युद्ध चल रहा था, तब अहिरावण नामक राक्षस ने अपनी मायावी शक्ति से श्रीराम और लक्ष्मण को मूर्छित कर पाताललोक में ले गया था। जब यह समाचार हनुमानजी को मिला, तो उन्होंने पाताल लोक की यात्रा की और अहिरावण का वध कर श्रीराम-लक्ष्मण को सुरक्षित लौटा लाए। ऐसा माना जाता है कि सांवेर वही पवित्र स्थल है, जहाँ से हनुमानजी ने पाताल में प्रवेश किया था, और उसी स्मृति में यहाँ उलटी मुद्रा में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई।

देशभर से उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

आज यह मंदिर सिर्फ सांवेर या इंदौर-उज्जैन क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर से लोग यहाँ दर्शन हेतु आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस मंदिर में सच्चे मन से प्रार्थना करने से हर कष्ट दूर होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। विशेष पर्वों, हनुमान जयंती और मंगलवार को यहाँ विशेष भीड़ उमड़ती है।

Published on:
11 Apr 2025 09:19 am
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