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MP के इस शहर को मिलेंगी ‘150 ई-बसें’, 32 रूट तय, कनेक्ट होंगे कई गांव

MP News: प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए मिल रही बसों के संचालन के लिए 32 रूट तय किए हैं।

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E-Buses

E-Buses प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)

MP News: प्रधानमंत्री ई सेवा योजना के तहत इंदौर को 150 ई-बसें मिलना है, जिसमें से 40 बसें यहां आ चुकी हैं। लोक परिवहन व्यवस्था चलाने वाली कंपनी एआइसीटीएसएल इनके संचालन के लिए दो डिपो तैयार कर रहा है, जिसे पूरा होने में समय लगेगा। इन बसों के टिकट कलेक्शन के लिए नई एजेंसी नियुक्त की जा रही है। संचालन शुरू होने में डेढ़ से दो महीने का समय लगेगा। करीब दो साल पहले इंदौर को ई-बसें मिलने की घोषणा हुई थी। एआइसीटीएसएल इनके लिए नायता मुंडला आइएसबीटी के पास व देवास नाका में दो डिपो बना रहा है, जहां चार्जिंग की व्यवस्था भी रहेगी।

सभी बसें मिलने के बाद इनका शुभारंभ प्रधानमंत्री से कराने के प्रयास हैं। एआइसीटीएसएल के मौजूदा सिस्टम में जितनी बसें अनुबंधित हैं उनके टिकट कलेक्शन का काम ऑपरटेर की टीम ही करती है और कंपनी की टीम निगरानी करती है। नई बसों के लिए नई एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया भोपाल से चल रही है। भोपाल से ही ऑपरेटर भी नियुक्त हुए हैं। कंपनी के कार्यकारी निदेशक अर्थ जैन के मुताबिक, ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन की एजेंसी को एक महीने में तय करेंगे। एजेंसी तय होने के बाद ही शुभारंभ होगा।

दूसरे शहरों के साथ स्थानीय स्तर पर भी संचालन

प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए मिल रही बसों के संचालन के लिए 32 रूट तय किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, नई ई-बसों का संचालन इंदौर के साथ दूसरे शहरों के लिए भी किया जाएगा। सर्वे के बाद रूट तय किए गए हैं। जिस रूट पर बसों की कमी है, लोगों को लोक परिवहन की जरूरत है वहां बसें चलेंगी। हालांकि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। साथ ही इन बसों को इंदौर से उज्जैन, खंडवा, खरगोन, बुरहानपुर, सेंधवा, भोपाल, धार, मांडव, महेश्वर के बीच भी चलाया जाएगा।

इंदौर में 270, भोपाल में चलेंगी 195 ई-बसें

केन्द्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के 8 नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस चलाने की मंजूरी दी है। इसमें सबसे ज्यादा 270 ई-बसें इंदौर को मिली हैं, जबकि राजधानी भोपाल को केवल 195 बसें मिली हैं। जबलपुर में 200, ग्वालियर में 100, उज्जैन में 100, सागर में 32, देवास में 55 और सतना में 20 ई-बसें संचालित की जाएंगी। लेकिन जमीनी तैयारियां अधूरी होने से यह परियोजना फिलहाल फाइलों और निर्माण स्थलों के बीच अटकी हुई है।

अधिकारियों के अनुसार जबलपुर में डिपो और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का काम 85 फीसदी से अधिक पूरा हो चुका है, जिससे वह इस मामले में सबसे आगे है। ग्वालियर में भी प्रगति संतोषजनक है। इसके विपरीत राजधानी भोपाल, इंदौर और अन्य शहरों में काम अपेक्षाकृत धीमा है। भोपाल में बैरागढ़ और कस्तूरबा नगर में बनाए जा रहे चार्जिंग स्टेशनों में अभी करीब 30% काम शेष है। इंदौर में नायता मुंडला और देवास नाका स्थित चार्जिंग स्टेशन भी अभी पूरे नहीं हो पाए हैं। सतना, उज्जैन और कटनी जैसे शहरों में स्थिति और धीमी बताई जा रही है।